स्टॉक मार्केट में प्रॉपशॉप इवेंट्स की निराशाजनक शुरुआत, कमजोर लिस्टिंग के बाद लगा लोअर सर्किट


व्यापार 03 August 2026
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स्टॉक मार्केट में प्रॉपशॉप इवेंट्स की निराशाजनक शुरुआत, कमजोर लिस्टिंग के बाद लगा लोअर सर्किट

नई दिल्ली, 03 अगस्त। एग्जीबिशन और ट्रेड शो के लिए मॉड्यूलर एग्जीबिशन बूथ की डिजाइनिंग और निर्माण से लेकर उसका प्रबंधन तक करने वाली कंपनी प्रॉपशॉप इवेंट्स एंड एग्जीबिशंस लिमिटेड के शेयरों ने आज स्टॉक मार्केट में जबरदस्त गिरावट के साथ एंट्री कर अपने आईपीओ निवेशकों को जोरदार झटका दिया। आईपीओ के तहत कंपनी के शेयर 69 रुपये के भाव पर जारी किए गए थे। आज एनएसई के एसएमई प्लेटफॉर्म पर इसकी लिस्टिंग 20 प्रतिशत डिस्काउंट के साथ 55.20 रुपये के स्तर पर हुई।

कमजोर लिस्टिंग के बाद निवेशकों को उस समय और झटका लगा, जब बाजार में प्रॉपशॉप इवेंट्स के शेयरों पर बिकवाली का दबाव बन गया। बिकवाली के दबाव के कारण थोड़ी देर में ही कंपनी के शेयर गिर कर 52.45 रुपये के लोअर सर्किट लेवल पर आ गए। इस तरह पहले दिन के कारोबार में ही कंपनी के आईपीओ निवेशकों को प्रति शेयर 16.55 रुपये यानी 23.99 प्रतिशत का नुकसान हो गया।

इस कंपनी का 28.57 करोड़ रुपये का आईपीओ 27 से 29 जुलाई के बीच सब्सक्रिप्शन के लिए खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों की ओर से एवरेज रिस्पॉन्स मिला था, जिसके कारण ये ओवरऑल 1.53 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इनमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (क्यूआईबी) के लिए रिजर्व पोर्शन 1.37 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसी तरह नॉन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (एनआईआई) के लिए रिजर्व पोर्शन में 1.38 गुना सब्सक्रिप्शन आया था। इसके अलावा रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए रिजर्व पोर्शन 1.77 गुना सब्सक्राइब हुआ था।

इस आईपीओ के तहत 10 रुपये फेस वैल्यू वाले कुल 41.4 लाख शेयर बेचे गए हैं। इनमें ऑफर फॉर सेल विंडो के जरिये बेचे जा रहे लगभग छह करोड़ रुपये के आठ लाख शेयर भी शामिल हैं। आईपीओ में नए शेयरों की बिक्री से जुटाए गए पैसे का इस्तेमाल कंपनी वर्किंग कैपिटल की जरूरतो को पूरा करने और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों में करेगी।

प्रॉपशॉप इवेंट्स एंड एग्जीबिशंस लिमिटेड की वित्तीय स्थिति की बात करें, तो कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सेबी के पास जमा कराए गए ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (डीआरएचपी) में किए गए दावे के मुताबिक इसकी वित्तीय सेहत लगातार मजबूत हुई है। वित्त वर्ष 2022-23 में कंपनी को 97 लाख रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था, जो अगले वित्त वर्ष 2023-24 में बढ़ कर 2.19 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2024-25 में उछल कर 6.32 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में फरवरी 2026 तक कंपनी को 6.46 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हो चुका था।

इस दौरान कंपनी की राजस्व प्राप्ति में भी लगातार बढ़ोतरी हुई। वित्त वर्ष 2022-23 में इसे 25.93 करोड़ का कुल राजस्व प्राप्त हुआ, जो वित्त वर्ष 2023-24 में बढ़ कर 30.57 करोड़ और वित्त वर्ष 2024-25 में उछल कर 51.59 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में फरवरी 2026 तक कंपनी को 59.94 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हो चुका था।

इस अवधि में कंपनी का रिजर्व और सरप्लस भी लगातार बढ़ता गया। वित्त वर्ष 2022-23 के अंत में कंपनी का रिजर्व और सरप्लस 1.04 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो वित्त वर्ष 2023-24 में बढ़ कर 2.24 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2024-25 में उछल कर 8.56 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में फरवरी 2026 तक की बात करें, तो इस दौरान कंपनी का रिजर्व और सरप्लस 6.49 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया था।

इस अवधि में कंपनी के नेटवर्थ में भी बढ़ोतरी हुई। वित्त वर्ष 2022-23 में ये 1.05 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो 2023-24 में बढ़ कर 4.17 करोड़ रुपये हो गया। इसी तरह 2024-25 में कंपनी का नेटवर्थ 11.32 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। वहीं पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में फरवरी 2026 तक ये 17.78 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया।

इसी तरह ईबीआईटीडीए (अर्निंग बिफोर इंट्रेस्ट, टैक्सेज, डिप्रेशिएशंस एंड एमॉर्टाइजेशन) 2022-23 में 1.28 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो 2023-24 में बढ़ कर 2.95 करोड़ रुपये और 2024-25 में 8.55 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। वहीं पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में फरवरी 2026 तक ये 8.93 करोड़ रुपये के स्तर पर था।

कंपनी पर लदे कर्ज के बोझ की बात करें तो 2022-23 में कंपनी पूरी तरह से कर्ज मुक्त थी। 2023-24 के अंत तक कंपनी पर 43 लाख रुपये का कर्ज लद गया था, जो अगले वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़ कर 63 लाख रुपये के स्तर पर पहुंच गया। इसके अगले वित्त वर्ष यानी 2025-26 में कंपनी ने कर्ज के बोझ को पूरी तरह खत्म कर दिया। फिलहाल कंपनी एक बार फिर पूरी तरह से कर्ज मुक्त हो चुकी है।

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