नई दिल्ली, 29 सितंबर इंडियन रेल, मेट्रो और रिन्यूएबल इनर्जी सिस्टम्स के लिए वैक्यूम सर्किट ब्रेकर (वीसीबी) बनाने वाली कंपनी वैंस इलेक्ट्रो इंजीनियरिंग लिमिटेड का 33.98 करोड़ रुपये का आईपीओ आज सब्सक्रिप्शन के लिए लॉन्च कर दिया गया। इस आईपीओ में एक अक्टूबर तक बोली लगाई जा सकती है। इश्यू की क्लोजिंग के बाद पांच अक्टूबर को शेयरों का अलॉटमेंट किया जाएगा, जबकि छह अक्टूबर को अलॉटेड शेयर डीमैट अकाउंट में क्रेडिट कर दिए जाएंगे। कंपनी के शेयर सात अक्टूबर को बीएसई के एसएमई प्लेटफॉर्म पर लिस्ट हो सकते हैं। लॉन्चिंग के बाद शाम 3:30 बजे तक यह आईपीओ 2.04 गुना सब्सक्राइब हो चुका था।
इस आईपीओ में बोली लगाने के लिए 112 रुपये से लेकर 118 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया गया है, जबकि लॉट साइज 1,200 शेयर का है। इस आईपीओ में रिटेल इनवेस्टर्स को दो लॉट यानी 2,400 शेयरों के लिए बोली लगाना होगा, जिसके लिए उन्हें 2,83,200 रुपये का निवेश करना होगा। इस आईपीओ के तहत 10 रुपये फेस वैल्यू वाले कुल 28.80 लाख नए शेयर जारी हो रहे हैं।
इस आईपीओ में क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (क्यूआईबी) के लिए 46.58 प्रतिशत हिस्सा रिजर्व किया गया है। इसके अलावा रिटेल इनवेस्टर्स के लिए 33.67 प्रतिशत हिस्सा, नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (एनआईआई) के लिए 14 प्रतिशत हिस्सा और एंप्लॉयीज के लिए 1.67 प्रतिशत हिस्सा रिजर्व है। इसके अलावा मार्केट मेकर के लिए 5.08 प्रतिशत हिस्सा रिजर्व किया गया है। इस इश्यू के लिए हेम सिक्योरिटीज लिमिटेड को बुक रनिंग लीड मैनेजर बनाया गया है, जबकि बिगशेयर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को रजिस्ट्रार बनाया गया है। वहीं हेम फिनलीज प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का मार्केट मेकर है।
वैंस इलेक्ट्रो इंजीनियरिंग की वित्तीय स्थिति की बात करें, तो कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सेबी के पास जमा कराए गए रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (आरएचपी) में किए गए दावे के मुताबिक इसकी वित्तीय सेहत लगातार मजबूत बनी रही है। वित्त वर्ष 2023-24 में कंपनी को सिर्फ दो लाख रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था, जो अगले वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़ कर 1.73 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का शुद्ध लाभ उछल कर 5.39 करोड़ रुपये हो गया।
इस दौरान कंपनी की राजस्व प्राप्ति में भी लगातार बढ़ोतरी हुई। वित्त वर्ष 2023-24 में इसे 2.76 करोड़ रुपये का कुल राजस्व प्राप्त हुआ, जो वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़ कर 13.82 करोड़ रुपये और 2025-26 में उछल कर 23.19 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। इस अवधि में कंपनी पर लदे कर्ज के बोझ में उतार चढ़ाव होता रहा। वित्त वर्ष 2023-24 के अंत में कंपनी पर 5.17 करोड़ रुपये के कर्ज का बोझ था, जो वित्त वर्ष 2024-25 में घट कर 1.20 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। इसके अगले वित्त वर्ष 2025-26 की बात करें, तो इस वित्त वर्ष के दौरान कंपनी पर लदे कर्ज का बोझ बढ़ कर 2.55 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया।
कंपनी का रिजर्व और सरप्लस भी इस अवधि में लगातार बढ़ता गया। वित्त वर्ष 2023-24 के अंत में कंपनी का रिजर्व और सरप्लस सिर्फ पांच लाख रुपये के स्तर पर था, जो वित्त वर्ष वित्त वर्ष 2024-25 में उछल कर 1.78 करोड़ रुपये के स्तर पर और 2025-26 में 7.17 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। इस अवधि में कंपनी के नेटवर्थ में भी बढ़ोतरी हुई। वित्त वर्ष 2023-24 में ये 1.05 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो 2024-25 में बढ़ कर 3.78 करोड़ रुपये के स्तर पर और पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में 9.17 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया।
इसी तरह ईबीआईटीडीए (अर्निंग बिफोर इंट्रेस्ट, टैक्सेज, डिप्रेशिएशंस एंड एमॉर्टाइजेशन) 2023-24 में सिर्फ दो लाख रुपये के स्तर पर था, जो 2024-25 में बढ़ कर 2.48 करोड़ रुपये के स्तर पर और पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में 7.23 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया।
सब्सक्रिप्शन के लिए खुला वैंस इलेक्ट्रो इंजीनियरिंग का आईपीओ, 7 अक्टूबर को हो सकती है लिस्टिंग














