खराब या बासी खाना खाने से अक्सर फूड पॉइजनिंग की समस्या हो जाती है। इस वक्त कई लोग फूड पॉइजनिंग की चपेट में आ रहे हैं। इसमें पेट में तेज मरोड़, ऐंठन, उल्टी, दस्त और कमजोरी महसूस होने लगती है। जब पेट में विषाक्त पदार्थ प्रवेश करते हैं, तो पाचन तंत्र उन्हें बाहर निकालने की कोशिश करता है, जिससे पेट दर्द शुरू होता है। ऐसे में सही पर इसका इलाज कराना बेहद जरूरी है। डॉ. निर्देश चौहान, सलाहकार, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, फोर्टिस, फ़रीदाबाद बता रहे हैं कि फूड पॉइजनिंग में होने वाले पेट दर्द से कैसे छुटकारा पाया जा सकता है।
1. इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस और हाइड्रेशन
उल्टी या दस्त से होने वाला डिहाइड्रेशन पेट की ऐंठन को और गंभीर बना देता है। ऐसे में इससे बचने के लिए ORS घोल पीते रहें। केवल सादा पानी पीने के बजाय डब्ल्यूएचओ-प्रमाणित ORS या नारियल पानी घूंट-घूंट कर पिएं। तरल पदार्थों को एक साथ अधिक मात्रा में न पिएं। हर 10-15 मिनट में थोड़ा-थोड़ा घूंट लें ताकि उल्टी की संभावना न रहे।
2. डाइट मॉडिफिकेशन
फूड पॉइजनिंग में हल्का खाना खाएं। मूंग दाल की पतली खिचड़ी, केला, उबले चावल, दलिया या टोस्ट लें। दूध और डेयरी प्रोडक्ट, कैफीनयुक्त पेय, तला-भुना, तीखे मसाले और अत्यधिक मीठे जूस से बचें। ये आंतों में फर्मेंटेशन और क्रैम्प्स को बढ़ाते हैं।
3. सिकाई से मांसपेशियों को राहत
पेट पर हॉट वाटर बैग या हीटिंग पैड से 15-20 मिनट हल्की सिकाई करें। तापमान आंतों की स्मूथ मांसपेशियों को रिलैक्स करता है, जिससे मरोड़ में फौरन आराम मिलता है।
4. दवाओं को लेकर जरूरी सावधानी
बिना डॉक्टर की सलाह के लोपेरामाइड जैसी दवाएं न लें। ये आंतों की गतिशीलता को रोक देती हैं, जिससे टॉक्सिन्स और बैक्टीरिया बाहर नहीं निकल पाते और संक्रमण बढ़ सकता है। ज्यादा दर्द या मरोड़ होने पर डॉक्टर के से कंसल्ट करें और फिर एंटीस्पास्मोडिक दवा का इस्तेमाल करें।
कब रहता है खतरा
यदि पेट में बहुत तेज दर्द हो, लगातार तेज बुखार (102°F से अधिक) आए, मल में खून या म्यूकस दिखे, या पेशाब बंद होने लगे, तो घरेलू उपचार छोड़कर तुरंत गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट या नजदीकी डॉक्टर से संपर्क करेंl

















