उत्तरी इथियोपिया में हेली गुब्बी ज्वालामुखी के विस्फोट से उठी राख का बड़ा बादल अरब सागर को पार कर सोमवार रात भारत की ओर पहुंच गया और अब उत्तर भारत के कुछ इलाकों के ऊपर मंडरा रहा है। इसकी वजह से एविएशन अधिकारियों ने एहतियात के तौर पर एयरलाइंस के लिए सुरक्षा दिशानिर्देश जारी कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे भारत की हवा की गुणवत्ता पर कोई खास असर पड़ने की उम्मीद नहीं है, क्योंकि राख का बादल वायुमंडल के मध्य स्तर पर मौजूद है और सतह तक इसके आने की संभावना बहुत कम है। रविवार को लंबे समय से शांत पड़े ज्वालामुखी के अचानक सक्रिय होने के बाद एक घना बादल बना था, जो लाल सागर होते हुए यमन और ओमान की दिशा में बढ़ता चला गया और फिर भारतीय उपमहाद्वीप की ओर आ गया। सोमवार रात करीब 11 बजे यह भारतीय हवाई क्षेत्र में दाखिल हुआ और दिल्ली के ऊपर दिखाई दिया, जिसके बाद इसके पंजाब और हरियाणा की ओर बढ़ने की आशंका जताई गई। इस असामान्य वायुमंडलीय गतिविधि को देखते हुए डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन ने एयरलाइंस को एक विस्तृत एडवाइजरी जारी की, जिसमें ज्वालामुखीय राख से प्रभावित क्षेत्रों और उड़ान स्तरों से बचने की सख्त सलाह दी गई है। एयरलाइंस को नवीनतम वॉल्केनिक ऐश एडवाइजरी के आधार पर अपने रूट, ऊंचाई और ईंधन गणना में बदलाव करने के निर्देश दिए गए हैं, क्योंकि राख के बीच उड़ान भरना खासकर जेट इंजनों के लिए बेहद खतरनाक होता है; राख के महीन कण इंजन के अंदर जाकर पिघल सकते हैं और गंभीर क्षति पहुंचा सकते हैं। इस बीच, IndiaMetSky Weather ने अपनी पोस्ट में बताया कि इस बादल में अभी सल्फर डाइऑक्साइड की मात्रा अधिक है और राख की सांद्रता कम से मध्यम स्तर की है। उनका कहना है कि यह बादल ओमान–अरब सागर क्षेत्र से आगे बढ़ते हुए उत्तर और मध्य भारत के मैदानी हिस्सों तक फैल रहा है, लेकिन इससे सतह पर वायु गुणवत्ता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। हालांकि नेपाल, हिमालयी क्षेत्रों और उत्तर प्रदेश के तराई इलाकों में सल्फर डाइऑक्साइड के स्तर में वृद्धि संभव है, क्योंकि यह बादल पहाड़ियों से टकराकर आगे चीन की ओर बढ़ जाएगा। मैदानी क्षेत्रों में ऐशफॉल की संभावना बहुत कम बताई गई है और यदि कहीं होता भी है तो बेहद मामूली मात्रा में। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि राख का बादल वायुमंडल के मध्य स्तर पर बना हुआ है, इसलिए सतह की हवा सुरक्षित रहेगी और हवा की गुणवत्ता में गिरावट की आशंका नहीं है। बादल धीरे-धीरे पश्चिम की ओर कमजोर पड़ता हुआ आगे बढ़ेगा, जबकि अधिकारी इसकी दिशा और असर पर लगातार नजर रखे हुए हैं। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे अपनी उड़ानों के बारे में एयरलाइंस से अपडेट लेते रहें, क्योंकि जब तक यह बादल पूरी तरह छंट नहीं जाता, तब तक उड़ान संचालन में देरी या मार्ग परिवर्तन जैसी दिक्कतें जारी रह सकती हैं।
उत्तर भारत सुरक्षित, इथियोपिया की राख से हवा पर कोई खतरा नहीं
















