अहिरन नदी में सैकड़ों मछलियों की मौत, पेयजल को लेकर विकास नगर में दहशत

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अहिरन नदी में सैकड़ों मछलियों की मौत, पेयजल को लेकर विकास नगर में दहशत

काेरबा, 23 मई । कुसमुंडा क्षेत्र के विकास नगर स्थित आईबीपी प्लांट के नीचे बहने वाली अहिरन नदी में शनिवार सुबह बड़ी संख्या में मछलियां मृत मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया। स्थानीय लोगों ने आशंका जताई है कि देर रात कुछ असामाजिक तत्वों ने विस्फोटक एवं ज्वलनशील पदार्थों का उपयोग कर मछलियों का शिकार किया, जिसके कारण नदी का पानी प्रदूषित हो गया और सैकड़ों मछलियों की मौत हो गई।

घटना के बाद विकास नगर कॉलोनी के लोगों में दहशत का माहौल है, क्योंकि इसी नदी से कॉलोनी में पेयजल की सप्लाई की जाती है। लोगों को आशंका है कि पानी में किसी प्रकार का केमिकल मिल जाने से स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है।

शनिवार सुबह जब स्थानीय लोग नदी किनारे पहुंचे तो पानी में बड़ी संख्या में मरी हुई मछलियां उतराती दिखाई दीं। नदी के पानी का रंग भी बदला हुआ नजर आया और आसपास बदबू फैल गई। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि रात के समय तेज धमाके जैसी आवाजें सुनाई दी थीं। इसके बाद सुबह यह स्थिति सामने आई।

स्थानीय निवासी रामलाल कश्यप ने बताया कि “पहली बार नदी में इतनी बड़ी संख्या में मछलियां मरी हुई दिखी हैं। पानी से बदबू आ रही है। इसी पानी का उपयोग कॉलोनी में होता है, इसलिए लोग डरे हुए हैं।”

वहीं कॉलोनी निवासी सीमा देवी ने कहा कि “बच्चे और बुजुर्ग यही पानी पीते हैं। प्रशासन को तुरंत पानी की जांच करानी चाहिए और वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए।”

ग्रामीणों ने यह भी आशंका जताई है कि कुछ लोग मरी हुई मछलियों को बीनकर घर ले जा रहे हैं, जिससे खतरा और बढ़ सकता है। लोगों का कहना है कि यदि पानी या मछलियों में किसी रासायनिक पदार्थ का असर हुआ तो इनके सेवन से गंभीर बीमारी फैल सकती है।

गाैरतलब है कि नदी में अभी भी मछलियों के मरने का सिलसिला जारी है।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन, मत्स्य विभाग और पुलिस से मामले की तत्काल जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि विस्फोटक पदार्थों से मछली मारना गंभीर अपराध है और इससे लोगों की जान भी खतरे में पड़ सकती है। ग्रामीणों ने दोषियों की पहचान कर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।

फिलहाल समाचार लिखे जाने तक पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर नहीं पहुंची थी। कॉलोनीवासियों ने एहतियातन नदी के पानी के उपयोग से दूरी बनानी शुरू कर दी है और प्रशासन से जल्द वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग की है।

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