भारत का फार्मास्युटिकल सेक्टर अब मैन्युफैक्चरिंग की ताकत से आगे बढ़कर वैश्विक इनोवेशन में नेतृत्व हासिल करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। नई दिल्ली में आयोजित आठवें CII फार्मा एंड लाइफसाइंसेज समिट में उद्योग, सरकार और विशेषज्ञों ने रिसर्च, अकादमिक संस्थानों और फार्मा कंपनियों के बीच साझेदारी को मजबूत बनाने पर जोर दिया।
‘फ्यूचर ऑफ फार्मा: पेशेंट-सेंट्रिक, इक्विटी-ड्रिवन एंड इनोवेशन-लेड’ थीम पर आयोजित इस सम्मेलन में नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. एम. श्रीनिवास ने कहा कि भारत के पास जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रतिभा और संस्थानों का मजबूत आधार मौजूद है। अब अकादमिक जगत और उद्योग के बीच व्यक्तिगत जरूरतों के अनुरूप साझेदारी विकसित करने और रिसर्च एंड डेवलपमेंट में निवेश बढ़ाने की जरूरत है।
फार्मास्यूटिकल्स विभाग के सचिव मनोज जोशी ने कहा कि आने वाले एक-दो महीनों में रेगुलेटरी सिस्टम में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए जा सकते हैं। इनमें RCGM और राज्य स्तर की मंजूरियों की प्रक्रिया को सरल बनाना, सवालों के जवाब और परीक्षण में तेजी लाना तथा समानांतर प्रक्रियाओं को बढ़ावा देना शामिल है।
उन्होंने कहा कि सरकार, उद्योग और अकादमिक संस्थानों को मिलकर काम करना होगा, ताकि भारत छोटे और बड़े दोनों तरह के अणुओं के विकास और इनोवेशन में अपनी महत्वाकांक्षा हासिल कर सके।
वहीं, ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया डॉ. राजीव सिंह रघुवंशी ने रिसर्च एंड डेवलपमेंट को आसान बनाने के लिए किए जा रहे नियामक सुधारों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि R&D के लिए कुछ नियामकीय अनुमतियों को हटाना और प्रोटोकॉल तैयार करने की प्रक्रिया को सरल बनाना महत्वपूर्ण बदलाव हैं। साथ ही, डिजिटल ड्रग रेगुलेटरी सिस्टम और AI आधारित हस्तक्षेप पर भी काम किया जा रहा है।
नीति आयोग की डिस्टिंग्विश्ड फेलो डेबजानी घोष ने स्वास्थ्य क्षेत्र में तेजी से विकसित हो रही तकनीक के नियंत्रण और मानकों पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत को केवल एक बड़े बाजार के रूप में नहीं, बल्कि इनोवेशन और तकनीकी मानक तय करने वाले देश के रूप में आगे बढ़ना चाहिए।
भारत बायोटेक की को-फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. सुचित्रा एला ने Biopharma SHAKTI के तहत पांच वर्षों में 10 हजार करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश, BioE3 और एक लाख करोड़ रुपये के रिसर्च, डेवलपमेंट एंड इनोवेशन फ्रेमवर्क का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि नीतिगत समर्थन शुरुआत है, मंजिल नहीं। असली चुनौती रिसर्च को तकनीक, उत्पाद और बड़े पैमाने पर उपयोगी कंपनियों में बदलने की है।
उन्होंने ROTAVAC, JENVAC और RTS,S मलेरिया वैक्सीन को सार्वजनिक संस्थानों और उद्योग के सहयोग से विकसित समाधानों के उदाहरण के तौर पर पेश किया।
बायोकॉन के सीईओ और CII नेशनल कमेटी ऑन फार्मास्यूटिकल्स के चेयरमैन श्रीहास तांबे ने कहा कि भारत ने मैन्युफैक्चरिंग उत्कृष्टता, किफायती दवाओं और वैश्विक उपस्थिति के दम पर ‘दुनिया की फार्मेसी’ के रूप में अपनी पहचान बनाई है। अब अगला लक्ष्य बायोफार्मा, बायोटेक्नोलॉजी और इनोवेशन में वैश्विक नेतृत्व हासिल करना है।
नोवार्टिस हेल्थकेयर के कंट्री प्रेसिडेंट अमिताभ दुबे ने भी कहा कि भारत वॉल्यूम आधारित फार्मा उद्योग से वैल्यू आधारित उद्योग की ओर बढ़ने के महत्वपूर्ण दौर में है।
कुल मिलाकर, CII फार्मा समिट में सामने आया संदेश स्पष्ट है—भारत की अगली फार्मास्युटिकल यात्रा केवल दवाओं के उत्पादन तक सीमित नहीं होगी, बल्कि रिसर्च, इनोवेशन और वैश्विक तकनीकी नेतृत्व पर केंद्रित होगी।


















