गजेंद्र सिंह शेखावत ने एनजीएमए में ‘तक्षणम’ प्रदर्शनी का किया उद्घाटन, 150 कलाकारों की कृतियां शामिल


देश 16 October 2026
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गजेंद्र सिंह शेखावत ने एनजीएमए में ‘तक्षणम’ प्रदर्शनी का किया उद्घाटन, 150 कलाकारों की कृतियां शामिल

केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय (एनजीएमए) में ‘तक्षणम’ प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इस प्रदर्शनी में विभिन्न पीढ़ियों और कलात्मक पृष्ठभूमियों से जुड़े 150 कलाकारों की 250 से अधिक कलाकृतियों और मूर्तियों को प्रदर्शित किया गया है। भारतीय मूर्तिकला की समृद्ध विरासत और आधुनिक कला-अभ्यासों को एक मंच पर प्रस्तुत करने वाली इस प्रदर्शनी के माध्यम से एनजीएमए ने पहली बार कलाकृतियों की बिक्री की पहल भी शुरू की है। इसका उद्देश्य कलाकारों को नए अवसर उपलब्ध कराने के साथ कला-संग्रहकर्ताओं और कला प्रेमियों के बीच उनका जुड़ाव बढ़ाना है।

भारतीय मूर्तिकला की परंपरा और आधुनिकता का संगम

‘तक्षणम’ प्रदर्शनी भारतीय मूर्तिकला के बदलते स्वरूप, उसकी निरंतरता और नई रचनात्मक संभावनाओं को सामने लाती है। इसमें विभिन्न पीढ़ियों के कलाकारों और मूर्तिकला की अलग-अलग शैलियों की कृतियों को शामिल किया गया है। प्रदर्शनी का उद्देश्य कलाकारों के बीच संवाद और विचारों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना तथा दर्शकों को भारतीय कला की विविधता से परिचित कराना है।

कला परंपराओं और रचनात्मक अभिव्यक्तियों को बढ़ावा

उद्घाटन के अवसर पर गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि कला भारत की सांस्कृतिक पहचान और रचनात्मक चेतना की महत्वपूर्ण अभिव्यक्ति है। उन्होंने कहा कि ‘तक्षणम’ जैसी पहल कलाकारों और दर्शकों को करीब लाती है। इससे पारंपरिक कलात्मक विरासत और आधुनिक अभिव्यक्तियों के प्रति समझ तथा सम्मान बढ़ता है। उन्होंने कहा कि स्थापित और उभरते कलाकारों को एक मंच पर लाने से रचनात्मकता को प्रोत्साहन मिलता है और आम लोगों का कला से जुड़ाव भी बढ़ता है।

कलाकारों को अवसर देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

संस्कृति मंत्रालय के सचिव विवेक अग्रवाल ने कहा कि मंत्रालय कलात्मक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने और देशभर के कलाकारों के लिए सार्थक अवसर तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है। उनके अनुसार, ‘तक्षणम’ विविध कलात्मक शैलियों को एक साथ प्रस्तुत करने के साथ कलाकारों की कृतियों को व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचाने का मंच उपलब्ध कराती है। एनजीएमए में पहली बार कलाकृतियों की बिक्री की शुरुआत कलाकारों, कला-संग्रहकर्ताओं और कला प्रेमियों के बीच संबंध मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

हड़प्पा से समकालीन कला तक मूर्तिकला की विरासत

एनजीएमए के महानिदेशक संजीव किशोर गौतम ने भारत की सदियों पुरानी मूर्तिकला परंपरा और समकालीन कलाकारों को प्रोत्साहन देने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत की मूर्तिकला विरासत उसके इतिहास, सांस्कृतिक उपलब्धियों और कलात्मक दृष्टिकोण को दर्शाती है। हड़प्पा और मोहनजोदड़ो की टेराकोटा तथा धातु की कलाकृतियों से लेकर ‘डांसिंग गर्ल’ और ‘पुरोहित-राजा’ जैसी प्रसिद्ध मूर्तियों तक, भारतीय कला ने अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। मंदिरों की मूर्तिकला और अजंता, एलोरा तथा खजुराहो जैसे स्थलों की कलात्मक परंपराएं भी इस विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि यह परंपरा आज की समकालीन कला में भी जारी है और अनीश कपूर तथा सुबोध गुप्ता जैसे कलाकारों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है।

‘तक्षणम’ नाम में छिपा है सृजन का भाव

संस्कृत धातु ‘तक्ष्’ से प्रेरित ‘तक्षणम’ शब्द का संबंध तराशने, आकार देने और गढ़ने की प्रक्रिया से है। प्रदर्शनी मूर्तिकला को विचारों, अनुभवों, सामग्रियों और आकारों के मेल से विकसित होने वाली निरंतर प्रक्रिया के रूप में प्रस्तुत करती है। इसमें परंपरा और आधुनिक नवाचार के बीच संबंध को रेखांकित किया गया है। विभिन्न पीढ़ियों के कलाकारों की कृतियां इस बात को दर्शाती हैं कि भारतीय मूर्तिकला समय के साथ नए रूप और विचार अपनाते हुए आगे बढ़ रही है।

दो प्रमुख भागों में विभाजित है प्रदर्शनी

‘तक्षणम’ को दो प्रमुख भागों में बांटा गया है। पहले भाग ‘विशिष्ट कलाकार’ में उन अनुभवी और वरिष्ठ कलाकारों की कृतियां शामिल हैं, जिनके योगदान ने भारतीय मूर्तिकला के विकास को दिशा दी है। दूसरे भाग ‘ओपन कॉल आर्टिस्ट्स’ में खुली चयन प्रक्रिया के तहत जूरी द्वारा चुने गए लगभग 80 से 90 कलाकारों के कार्य प्रदर्शित किए गए हैं। इसके अलावा, एनजीएमए के अपने संग्रह से भी कलाकृतियां शामिल की गई हैं। इससे स्थापित कलाकारों और नई रचनात्मक संभावनाओं के साथ प्रयोग कर रहे कलाकारों के बीच कलात्मक संवाद का अवसर मिलता है।

पहली बार कलाकृतियों की बिक्री की शुरुआत

इस प्रदर्शनी की प्रमुख विशेषताओं में एनजीएमए में पहली बार कलाकृतियों की बिक्री की पहल शामिल है। इसके जरिए कलाकारों को अपनी कृतियां कला-संग्रहकर्ताओं और कला प्रेमियों तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा। इस पहल का उद्देश्य मूर्तिकला के प्रति लोगों की रुचि बढ़ाने के साथ कलाकारों के लिए वित्तीय अवसरों के नए रास्ते खोलना है। मूर्तिकला में सामग्री की अधिक लागत, विशेष कौशल और लंबे समय तक मेहनत की जरूरत होती है। ऐसे में कलाकृतियों की बिक्री कलाकारों के कला-अभ्यास को अधिक टिकाऊ और आत्मनिर्भर बनाने में मदद कर सकती है।

15 नवंबर तक देख सकेंगे दर्शक

‘तक्षणम’ प्रदर्शनी का उद्देश्य भारत की समृद्ध मूर्तिकला विरासत का उत्सव मनाने के साथ समकालीन कलाकारों के योगदान को सम्मान देना है। यह प्रदर्शनी कलात्मक विचारों के आदान-प्रदान, जनभागीदारी और भारतीय मूर्तिकला के प्रति बेहतर समझ विकसित करने का मंच उपलब्ध कराती है। नई दिल्ली में इंडिया गेट के पास जयपुर हाउस स्थित राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय में यह प्रदर्शनी 15 नवंबर 2026 तक आम जनता और दर्शकों के लिए खुली रहेगी।

जनभागीदारी से कला के प्रति जागरूकता

संस्कृति मंत्रालय के अधीन संचालित राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय आधुनिक और समकालीन भारतीय कला के संरक्षण, संवर्धन तथा प्रसार के लिए समर्पित प्रमुख संस्थान है। प्रदर्शनियों, शैक्षिक पहलों और जनभागीदारी कार्यक्रमों के माध्यम से यह संस्थान भारत की कलात्मक विरासत और बदलती रचनात्मक अभिव्यक्तियों के प्रति समझ विकसित करने का काम करता है। 

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