मीडिया से बातचीत के दौरान ट्रंप ने संकेत दिया कि सऊदी अरब को इजरायल की सहायता की पेशकश स्वीकार कर लेनी चाहिए। उनके अनुसार, इस तरह का सहयोग क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने और साझा चुनौतियों का सामना करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। हूती विद्रोही यमन में सक्रिय हैं और उनके हमलों ने क्षेत्रीय समुद्री मार्गों तथा व्यापक सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंताएं बढ़ाई हैं। ऐसे में इजरायल की सहायता का प्रस्ताव दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग की संभावनाओं को उजागर करता है। हालांकि, सऊदी अरब इस प्रस्ताव पर क्या रुख अपनाएगा, यह उसकी विदेश नीति और क्षेत्रीय परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
ट्रंप ने इस अवसर पर सऊदी अरब और इजरायल के बीच संबंधों को सामान्य बनाने की संभावना पर भी जोर दिया। उन्होंने आशा व्यक्त की कि सऊदी अरब भविष्य में अब्राहम समझौते में शामिल हो सकता है। वर्ष 2020 में शुरू किए गए इन समझौतों का उद्देश्य इजरायल और अरब देशों के बीच राजनयिक संबंध स्थापित करना तथा आर्थिक, राजनीतिक और सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा देना है। संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन जैसे देशों ने इस प्रक्रिया के तहत इजरायल के साथ संबंध सामान्य किए थे। हालांकि, सऊदी अरब की भागीदारी लंबे समय से क्षेत्रीय कूटनीति का एक महत्वपूर्ण मुद्दा बनी हुई है।
















