दुर्ग । दुर्ग जिले में सीमांकन और रकबा बैठाने के नाम पर कथित सौदेबाजी का बड़ा मामला सामने आया है। जमीन कारोबारी रजत सुराना ने राजस्व विभाग के आरआई विजय शर्मा पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि विवादित सीमांकन मामलों में जानबूझकर पेचीदगी बताकर “टीम गठन” किया जाता है और फिर पक्ष विशेष के पक्ष में फैसला करने के लिए पैसों की मांग की जाती है।
रजत सुराना ने पत्रकारों से चर्चा में बताया कि उन्होंने वर्ष 2005 में खसरा नंबर 80/3 की 0.417 हेक्टेयर भूमि पवन अग्रवाल से खरीदी थी। इसी खसरे से कई अन्य लोगों को भी वर्ष 1994 से 2005 के बीच जमीन बेची गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उस जमीन के बीच छोड़े गए 30 फीट और 60 फीट चौड़े सड़क मार्ग का रकबा आज भी मूल खसरा नंबर 80/3 में दर्ज है, लेकिन अब उसे उनकी भूमि खसरा नंबर 80/352 में जबरन समायोजित करने का प्रयास किया जा रहा है।
सुराना का आरोप है कि पवन अग्रवाल के पुत्र और निगम के एमआईसी सदस्य निलेश अग्रवाल राजनीतिक प्रभाव और दबाव का उपयोग कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि कई नामांतरण प्रकरणों में स्वयं पवन अग्रवाल यह स्वीकार कर चुके हैं कि बची हुई भूमि सड़क मार्ग की है, जिसका उल्लेख तहसीलदार के आदेशों में भी दर्ज है।
रजत सुराना ने आरआई विजय शर्मा पर 25 लाख रुपये की मांग करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जब उन्होंने पैसे देने से इनकार किया, तो उनसे कहा गया कि “काम उसी के पक्ष में होगा जो पैसे देगा।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनकी आपत्तियां लेने से इनकार किया गया और रिसीविंग तक नहीं दी गई।
उन्होंने बताया कि 14 मई 2026 की रात सीमांकन से ठीक पहले आरआई विजय शर्मा को निलेश अग्रवाल और पुलगांव पटवारी के साथ पटेल चौक के पास देखा गया, जिससे पूरे मामले में मिलीभगत की आशंका और मजबूत हो गई।
रजत सुराना ने शासन और प्रशासन से मांग की है कि दुर्ग जिले के सभी विवादित सीमांकन और रकबा बैठाने के मामलों की पुनः जांच कराई जाए। साथ ही आरआई विजय शर्मा को तत्काल इस प्रकरण से अलग कर उनकी कॉल डिटेल और भूमिका की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उन्होंने यह भी मांग की कि खसरा नंबर 80/3 की बची भूमि को राजस्व अभिलेख में अलग सड़क मार्ग घोषित किया जाए।
दुर्ग में सीमांकन में RI का बड़ा खेल, रकबा बैठाने के नाम पर बड़ी सौदेबाजी















