सारनाथ में युवा बौद्ध शोध के चौथे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन (आईसीवाईबीएस) का आयोजन किया गया। अंतरराष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ (आईबीसी) ने केंद्रीय उच्च तिब्बती अध्ययन संस्थान (सीआईएचटीएस) के सहयोग से आयोजित इस सम्मेलन की थीम ‘आज की पीढ़ी के लिए बुद्ध का मध्यम मार्ग’ रखी। सम्मेलन में विभिन्न देशों से आए प्रतिनिधियों ने भाग लिया और बुद्ध के मध्यम मार्ग की समकालीन प्रासंगिकता पर विचार साझा किए।
वैश्विक शांति के लिए मध्यम मार्ग का संदेश
आईबीसी की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा जानकारी के अनुसार, प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए आईबीसी के सेक्रेटरी जनरल शार्त्से खेंसुर जंगचुप चोएडेन रिनपोछे ने कहा कि वैश्विक संघर्ष और बढ़ते तनाव के दौर में बुद्ध का मध्यम मार्ग शांति, संवाद और सह-अस्तित्व का उपयुक्त मार्गदर्शन प्रदान करता है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस संदेश का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत ने दुनिया को “बुद्ध दिया है, युद्ध नहीं।”
राजनीतिक और वैश्विक संबंधों के लिए भी प्रासंगिक
मुख्य अतिथि एवं बीएचयू के कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि मध्यम मार्ग केवल व्यक्तिगत जीवन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राजनीतिक विमर्श और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में भी संतुलन, विवेक और संवाद की भावना को मजबूत करता है।
करुणा और ज्ञान के प्रसार पर जोर
सीआईएचटीएस के कुलपति वेन. प्रो. वांगचुक दोरजी नेगी ने चार आर्य सत्य और आश्रित उत्पत्ति के सिद्धांतों को करुणा का मार्गदर्शक बताया। वहीं, आईबीसी के महानिदेशक राघव प्रसाद भटनागर ने युवा शोधकर्ताओं से ‘धम्म सेतु’ बनने का आह्वान करते हुए बुद्ध के ज्ञान और संदेश को व्यापक समाज तक पहुंचाने की अपील की।
तीसरे सम्मेलन में भी हुई थी समकालीन चुनौतियों पर चर्चा
इससे पहले युवा बौद्ध विद्वानों के तीसरे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के तत्वावधान में अंतरराष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ ने डॉ. अंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र (डीएआईसी) के सहयोग से नई दिल्ली में किया था। उस सम्मेलन का विषय “21वीं सदी में बुद्ध धम्म में ज्ञान का संचरण” था। इसमें रूस, वियतनाम, कंबोडिया, श्रीलंका, म्यांमार, ताइवान और भारत सहित कई देशों के युवा विद्वानों, प्रोफेसरों, भिक्षुओं और गणमान्य लोगों ने भाग लिया था।
डिजिटल युग में बुद्ध धम्म के प्रसार पर मंथन
तीसरे सम्मेलन में करुणा, सजगता और नैतिक आचरण पर आधारित बुद्ध धम्म को डिजिटल नवाचार, अंतर-सांस्कृतिक संवाद, शिक्षा और व्यक्तिगत अभ्यास के माध्यम से प्रभावी ढंग से प्रसारित करने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई थी।













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