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निष्क्रिय फाल्कन-9
(Falcon 9) रॉकेट स्टेज के चंद्रमा की सतह से टकराने की संभावना को
लेकर कई दावे किए जा रहे हैं। हालांकि "चांद पर तबाही" जैसे दावे
अतिरंजित हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार यह टक्कर चंद्रमा के विशाल आकार की तुलना में
बहुत छोटी होगी और इससे चंद्रमा को किसी बड़े स्तर का नुकसान नहीं होगा।
रिपोर्टों के अनुसार, अंतरिक्ष में वर्षों से निष्क्रिय एक
रॉकेट स्टेज चंद्रमा की ओर बढ़ रहा है और उसके चंद्र सतह से टकराने की संभावना
जताई गई है। टक्कर होने पर चंद्रमा की सतह पर एक नया क्रेटर (गड्ढा) बन सकता है,
जिसका अध्ययन वैज्ञानिकों के लिए महत्वपूर्ण होगा। क्या धरती से
दिखाई देगी टक्कर? आम तौर पर ऐसी टक्कर धरती से खुली आंखों
या सामान्य दूरबीन से देख पाना संभव नहीं होता। यदि टक्कर चंद्रमा के उस हिस्से पर
होती है जो पृथ्वी की ओर है और सही प्रकाशीय परिस्थितियां हों, तब भी उसका प्रत्यक्ष दृश्य देख पाना बेहद कठिन है। वैज्ञानिक आमतौर पर
ऑर्बिटर और विशेष दूरबीनों की मदद से इसके प्रभावों का अध्ययन करते हैं।
चंद्रमा
पर पहले भी लाखों-करोड़ों वर्षों से उल्कापिंड और अंतरिक्षीय पिंड टकराते रहे हैं।
फाल्कन-9 जैसे रॉकेट स्टेज की टक्कर से
केवल स्थानीय स्तर पर एक छोटा क्रेटर बनने की संभावना होती है। इससे चंद्रमा की
कक्षा, संरचना या पृथ्वी पर किसी प्रकार का खतरा नहीं होगा।
वैज्ञानिकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह घटना? ऐसी
टक्करों से बनने वाले नए क्रेटर का अध्ययन कर वैज्ञानिक चंद्रमा की सतह की संरचना,
धूल (रेगोलिथ) और भूगर्भीय विशेषताओं के बारे में नई जानकारी जुटाते
हैं। यह भविष्य के चंद्र अभियानों और अनुसंधान में भी उपयोगी साबित हो सकता है।
सोशल मीडिया पर वायरल दावों से रहें सावधान सोशल मीडिया पर "चांद पर
तबाही", "धरती से साफ दिखाई देगी टक्कर" या
"चंद्रमा को बड़ा नुकसान होगा" जैसे दावे किए जा रहे हैं। उपलब्ध
वैज्ञानिक जानकारी के आधार पर ऐसे दावों का समर्थन नहीं होता। यह घटना वैज्ञानिक
दृष्टि से रोचक जरूर है, लेकिन आम लोगों के लिए किसी खतरे का
कारण नहीं है।








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