स्वास्थ्य संबंधी सही जानकारी को जन-जन तक पहुंचाने और बच्चों में होने वाली बीमारियों की समय पर पहचान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पालुराम धनानिया कॉमर्स एवं आर्ट्स कॉलेज, रायगढ़ के 145 विद्यार्थियों को सामुदायिक स्वास्थ्य स्वयंसेवक के रूप में उन्मुखीकृत किया गया। जिला स्वास्थ्य विभाग, रायगढ़ द्वारा यूनिसेफ छत्तीसगढ़ एवं एमसीसीआर ट्रस्ट के सहयोग से आयोजित इस विशेष उन्मुखीकरण कार्यक्रम में विद्यार्थियों को सिकल सेल रोग, टाइप-1 मधुमेह, जन्मजात हृदय रोग सहित मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल स्वास्थ्य संबंधी जानकारी देना ही नहीं, बल्कि उन्हें ‘स्वास्थ्य जागरूकता के युवा दूत’ के रूप में तैयार करना रहा, ताकि वे अपने परिवार, मित्रों और आसपास के समुदाय तक विश्वसनीय स्वास्थ्य संदेश पहुंचा सकें। विशेषज्ञों ने बताया कि जागरूक युवा बीमारियों के शुरुआती संकेतों की पहचान, भ्रांतियों को दूर करने और जरूरतमंद लोगों को समय पर स्वास्थ्य संस्थानों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
बच्चों में बीमारी के शुरुआती संकेतों की पहचान पर विशेष जोर
उन्मुखीकरण के दौरान बच्चों में होने वाले गैर-संचारी रोगों की समय पर पहचान को विशेष महत्व दिया गया। विद्यार्थियों को बताया गया कि अत्यधिक प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, बिना किसी स्पष्ट कारण के वजन कम होना तथा लगातार थकान या कमजोरी टाइप-1 मधुमेह के संभावित शुरुआती संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर बच्चे की समय पर जांच कराना जरूरी है, ताकि बीमारी की पहचान में देरी न हो और आवश्यक उपचार शीघ्र शुरू किया जा सके। इसी प्रकार सिकल सेल रोग के संबंध में समय पर जांच, नियमित उपचार और फॉलो-अप के महत्व की जानकारी दी गई। विद्यार्थियों को सिकल सेल रोग से जुड़ी भ्रांतियों एवं सामाजिक भेदभाव को दूर करने तथा प्रभावित बच्चों एवं उनके परिवारों को आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने के लिए प्रेरित किया गया। जन्मजात हृदय रोग के संभावित संकेतों की पहचान और समय पर रेफरल के महत्व पर भी जानकारी दी गई। विद्यार्थियों को समझाया गया कि बच्चों में असामान्य स्वास्थ्य संकेत दिखाई देने पर स्वयं उपचार की सलाह देने के बजाय उन्हें नजदीकी स्वास्थ्य संस्था अथवा स्वास्थ्य कार्यकर्ता से संपर्क करने के लिए प्रेरित करना चाहिए।
मातृ-शिशु स्वास्थ्य के संदेश भी पहुंचाएंगे युवा स्वयंसेवक
कार्यक्रम में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को भी प्रमुखता से शामिल किया गया। विद्यार्थियों को गर्भवती महिलाओं की नियमित स्वास्थ्य जांच, सुरक्षित एवं संस्थागत प्रसव, संतुलित एवं पौष्टिक आहार, एनीमिया की रोकथाम, नवजात शिशु की उचित देखभाल, स्तनपान तथा बच्चों के समय पर और पूर्ण टीकाकरण के महत्व की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता के साथ-साथ सही जानकारी का सही समय पर समुदाय तक पहुंचना भी बेहद महत्वपूर्ण है। युवा स्वयंसेवक अपने परिवार एवं आसपास के लोगों के बीच स्वास्थ्य संबंधी विश्वसनीय जानकारी साझा कर समुदाय और स्वास्थ्य व्यवस्था के बीच एक प्रभावी सेतु के रूप में कार्य कर सकते हैं। विद्यार्थियों से आह्वान किया गया कि वे अपने आसपास के लोगों को बीमारियों के शुरुआती लक्षणों के प्रति जागरूक करें, संभावित लक्षण दिखाई देने पर संबंधित व्यक्ति को समय पर स्वास्थ्य संस्था तक पहुंचने के लिए प्रेरित करें तथा स्वास्थ्य संबंधी भ्रांतियों को दूर करने में सहयोग करें। साथ ही जरूरतमंद बच्चों, गर्भवती महिलाओं एवं परिवारों को उपलब्ध सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की गई।
कार्यक्रम मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल कुमार जगत एवं जिला कार्यक्रम प्रबंधक श्रीमती रंजना पैकरा के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। इस अवसर पर जिला नोडल अधिकारी-एनसीडी डॉ. जावेद, जिला जन स्वास्थ्य नर्स श्रीमती सीमा बरेट तथा जिला सिकल सेल नोडल अधिकारी डॉ. सुमित मंडल उपस्थित रहे। कार्यक्रम के आयोजन में यूनिसेफ के हेल्थ स्पेशलिस्ट डॉ. गजेन्द्र सिंह एवं उनकी टीम का तकनीकी सहयोग रहा। वहीं डब्ब्त् ट्रस्ट के डायरेक्टर डॉ. डी. श्याम कुमार एवं उनकी टीम ने आयोजन एवं समन्वय में सहयोग प्रदान किया। कॉलेज प्रबंधन एवं शिक्षकों ने विद्यार्थियों की सहभागिता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
रायगढ़ : अब युवा बनेंगे स्वास्थ्य जागरूकता की आवाज














