एशियन गेम्स मेडलिस्ट बाबू लाल यादव ने सुनाई संघर्ष की कहानी


खेल 15 September 2026
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एशियन गेम्स मेडलिस्ट बाबू लाल यादव ने सुनाई संघर्ष की कहानी

एशियाई खेलों के पदक विजेता रोवर बाबू लाल यादव ने अपनी खेल यात्रा, सेना की जिंदगी और सफलता के पीछे परिवार के योगदान को लेकर खुलकर बात की है। उन्होंने बताया कि एक खिलाड़ी के रूप में आगे बढ़ने का सफर केवल मैदान या पानी में किए गए अभ्यास तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसके पीछे अनुशासन, लगातार मेहनत और परिवार के कई त्याग भी जुड़े होते हैं। बाबू लाल यादव ने अपनी रोइंग यात्रा को याद करते हुए उन चुनौतियों का जिक्र किया, जिनका सामना उन्हें खेल में पहचान बनाने के दौरान करना पड़ा। रोइंग शारीरिक क्षमता के साथ जबरदस्त सहनशक्ति और तालमेल की मांग करने वाला खेल है। इसके लिए खिलाड़ियों को लंबे समय तक नियमित और कठिन प्रशिक्षण से गुजरना पड़ता है।

बाबू लाल ने सेना से जुड़े अपने अनुभवों पर भी बात की। उनके मुताबिक आर्मी की जिंदगी में अनुशासन और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की सीख मिलती है। यही अनुभव उनके खेल करियर में भी काम आया। नियमित प्रशिक्षण और लक्ष्य पर लगातार ध्यान बनाए रखना उनकी सफलता के महत्वपूर्ण पहलुओं में शामिल रहा।

उन्होंने अपने सफर के दौरान मिले पारिवारिक समर्थन को याद करते हुए संकेत दिया कि मेडल के पीछे केवल खिलाड़ी की मेहनत नहीं होती, बल्कि उन लोगों का योगदान भी रहता है जो मुश्किल समय में उसके साथ खड़े रहते हैं। रोइंग में भारत के लिए जीता पदक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक हासिल करना किसी भी खिलाड़ी के लिए बड़ी उपलब्धि होती है। एशियाई खेलों में पदक जीतने वाले बाबू लाल की यात्रा भी वर्षों की ट्रेनिंग और अनुशासन का परिणाम रही है। उनकी सफलता ने भारतीय रोइंग को बड़े मंच पर पहचान दिलाने में योगदान दिया। बाबू लाल यादव की कहानी सेना, खेल और परिवार के बीच संतुलन बनाने वाले खिलाड़ी के संघर्ष की झलक देती है। उनकी यात्रा बताती है कि पोडियम पर दिखाई देने वाले मेडल के पीछे वर्षों की मेहनत के साथ परिवार का समर्थन और कई व्यक्तिगत त्याग भी छिपे होते हैं।


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