सिर्फ 3 दिन में समुद्री पानी से 70% से ज्यादा यूरेनियम अलग


विज्ञान 07 September 2026
post

सिर्फ 3 दिन में समुद्री पानी से 70% से ज्यादा यूरेनियम अलग

भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु के शोधकर्ताओं ने समुद्री पानी से यूरेनियम निकालने का एक अधिक प्रभावी तरीका विकसित किया है। यह तकनीक भूजल से यूरेनियम को अधिक प्रभावी तरीके से हटाने में भी मदद कर सकती है।

IISc के अनुसार, समुद्री पानी से यूरेनियम निकालने की प्रभावी तकनीक परमाणु ईंधन की लंबे समय तक टिकाऊ आपूर्ति सुनिश्चित करने का एक महत्वपूर्ण रास्ता बन सकती है। वहीं, भूजल में यूरेनियम का प्रदूषण पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय है।

समुद्र में जमीन से कहीं ज्यादा यूरेनियम

जमीन पर मौजूद यूरेनियम के भंडार तेजी से कम हो रहे हैं। ऐसे में वैज्ञानिक समुद्री पानी से यूरेनियम निकालने पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। अनुमान के मुताबिक, जमीन पर करीब 75 लाख टन यूरेनियम मौजूद है, जबकि समुद्री पानी में लगभग 450 करोड़ टन यूरेनियम है। यह परमाणु बिजली संयंत्रों के लिए जरूरी सामग्री है।

वैज्ञानिकों ने अब तक समुद्री पानी और अन्य जलीय वातावरण से यूरेनियम निकालने के लिए कई तरह की सामग्री विकसित की है। इनमें porous organic polymers और functional nanomaterials शामिल हैं।

हालांकि, समुद्री पानी में यूरेनियम के साथ बड़ी मात्रा में दूसरे आयन भी मौजूद होते हैं। ऐसे में केवल रासायनिक क्रियाओं के आधार पर यूरेनियम को बाकी आयनों से अलग करना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

COF झिल्लियों से यूरेनियम को अलग करने की नई तकनीक

IISc के भौतिकी विभाग में किए गए एक नए अध्ययन में इस समस्या से निपटने का नया तरीका सामने आया है। शोधकर्ताओं ने बताया कि विशेष रूप से तैयार की गई slipped covalent organic framework (COF) membranes यूरेनियम के uranyl ions को पूरी तरह रोक सकती हैं, जबकि समुद्री पानी में मौजूद सामान्य आयनों को इसके पार जाने देती हैं।

शोधकर्ताओं ने इस प्रक्रिया के पीछे मौजूद आणविक स्तर के तंत्र का भी अध्ययन किया। उन्होंने आयनों की hydration structures, free-energy barriers और membrane-induced friction का विश्लेषण किया। इससे यह समझने में मदद मिली कि COF की परतों की संरचना अलग-अलग आयनों की झिल्ली के जरिए आवाजाही को किस तरह नियंत्रित करती है।

रसायनों पर कम, झिल्ली की संरचना पर ज्यादा निर्भर

पारंपरिक तरीकों में यूरेनियम को चुनिंदा तरीके से पकड़ने के लिए झिल्ली में कई तरह के रासायनिक समूह जोड़े जाते हैं। इसके विपरीत, नई तकनीक COF की परतों को एक-दूसरे के ऊपर थोड़ा खिसकाकर बनने वाली प्राकृतिक संरचनात्मक बाधा का इस्तेमाल करती है।

इससे आयनों की आवाजाही को मुख्य रूप से झिल्ली की नैनोस्केल संरचना के जरिए नियंत्रित किया जा सकता है, न कि केवल यूरेनियम के साथ मजबूत रासायनिक संपर्क पर निर्भर रहना पड़ता है।

शोध से यह भी पता चलता है कि layered COF membranes की संरचना में बदलाव करके आयनों के गुजरने के रास्ते और उनकी ऊर्जा संबंधी स्थितियों को नियंत्रित किया जा सकता है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, molecular simulations और बेहतर membrane design को साथ इस्तेमाल करके पर्यावरण और ऊर्जा से जुड़ी जटिल समस्याओं के लिए अत्यधिक चयनात्मक separation technologies विकसित की जा सकती हैं।

यह शोध योगेंद्र कुमार और बिनू वर्गीज ने प्रबल के. मैती के मार्गदर्शन में किया। इस अध्ययन में बेंगलुरु स्थित Accenture Labs ने भी सहयोग किया।

You might also like!