अब अनजान नंबरों से कॉल आने पर दिखेगा असली नाम: TRAI ने दी CNAP सर्विस को मंजूरी


विज्ञान 14 November 2025
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अब अनजान नंबरों से कॉल आने पर दिखेगा असली नाम: TRAI ने दी CNAP सर्विस को मंजूरी

भारत में मोबाइल यूज़र्स के लिए बड़ी खबर है। जल्द ही आपके फोन पर किसी अनजान नंबर से कॉल आने पर कॉलर का असली नाम दिखेगा — वो भी बिना किसी थर्ड-पार्टी ऐप के। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने Calling Name Presentation (CNAP) सर्विस को मंजूरी दे दी है। दूरसंचार विभाग (DoT) के साथ मिलकर इस सिस्टम को देशभर में लागू किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य स्पैम और फ्रॉड कॉल्स पर लगाम लगाना है।

क्या है CNAP और कैसे करेगा काम?
CNAP एक नेटवर्क-आधारित सर्विस है जो कॉल आने पर नंबर के साथ कॉलर का असली नाम दिखाएगी। यह नाम किसी ऐप के डेटाबेस से नहीं, बल्कि टेलीकॉम ऑपरेटर के वेरिफाइड रिकॉर्ड से लिया जाएगा — यानी सिम कार्ड लेते समय आपके KYC डॉक्यूमेंट में जो नाम दर्ज किया गया था, वही डिस्प्ले होगा।

इससे कॉलर की पहचान लगभग 100% सटीक होगी और धोखाधड़ी की संभावना काफी घटेगी।

डिफॉल्ट रूप से चालू रहेगी सर्विस
TRAI और DoT ने तय किया है कि यह सर्विस सभी यूज़र्स के लिए डिफॉल्ट रूप से ऑन रहेगी। यानी इसे एक्टिवेट करने के लिए किसी सेटिंग की जरूरत नहीं होगी। हालांकि, प्राइवेसी को ध्यान में रखते हुए यूज़र्स को “opt-out” का विकल्प भी दिया जाएगा — यानी अगर कोई यूज़र नहीं चाहता कि उसका नाम दूसरों को दिखे, तो वह अपने टेलीकॉम ऑपरेटर से इसे बंद करवा सकता है।

स्पैम और फ्रॉड कॉल्स पर लगेगी रोक
CNAP सर्विस से कॉलर की पहचान छिपाना लगभग असंभव हो जाएगा। इससे बैंक अधिकारी, कस्टमर केयर एग्जीक्यूटिव या किसी और के नाम पर की जाने वाली धोखाधड़ी पर लगाम लगेगी।

इसके अलावा, रजिस्टर्ड कंपनियां अपने ब्रांड या ट्रेड नेम को डिस्प्ले करा सकेंगी, जिससे असली और फर्जी कमर्शियल कॉल्स में फर्क करना आसान होगा।

कब शुरू होगी सर्विस?
DoT ने टेलीकॉम कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे एक हफ्ते के भीतर किसी एक सर्किल में CNAP का पायलट प्रोजेक्ट शुरू करें। यह ट्रायल करीब 60 दिनों तक चलेगा।

टेस्टिंग सफल रहने पर इसे चरणबद्ध तरीके से पूरे देश में लागू किया जाएगा। शुरुआत में सर्विस 4G और 5G नेटवर्क पर उपलब्ध होगी, बाद में इसे 2G और 3G नेटवर्क के लिए भी लाया जाएगा।


TRAI की CNAP सर्विस से भारत में मोबाइल कॉलिंग सिस्टम और ज़्यादा पारदर्शी और सुरक्षित होने की उम्मीद है। यह कदम न सिर्फ यूज़र्स की सुरक्षा बढ़ाएगा, बल्कि फर्जी कॉल्स और स्कैम्स पर भी बड़ा असर डालेगा।

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