अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड पर बढ़ी चिंता, विशेषज्ञों ने दी संतुलित आहार अपनाने की सलाह

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अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड पर बढ़ी चिंता, विशेषज्ञों ने दी संतुलित आहार अपनाने की सलाह

अगर आपकी थाली में पैकेटबंद स्नैक्स, इंस्टेंट नूडल्स, शुगरी ड्रिंक्स और रेडी-टू-ईट फूड की मात्रा लगातार बढ़ रही है, तो यह खबर आपके लिए है। हाल ही में सामने आए एक अध्ययन में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड के अधिक सेवन को हृदय रोगों के बढ़ते खतरे से जोड़ा गया है। वहीं भारत में खाद्य सुरक्षा नियामक एफएसएसएआई भी भ्रामक फूड लेबल और दावों पर सख्ती बरत रहा है।

अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड ऐसे खाद्य पदार्थ होते हैं, जिनमें अधिक मात्रा में चीनी, नमक, अस्वास्थ्यकर वसा और कई तरह के एडिटिव्स मिलाए जाते हैं। इनमें पैकेटबंद चिप्स, कोल्ड ड्रिंक, इंस्टेंट फूड, प्रोसेस्ड मीट और कई रेडी-टू-ईट उत्पाद शामिल हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इनका नियमित और अधिक सेवन लंबे समय में स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।

हाल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, यदि लोग अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का सेवन कम करें, तो हृदय रोग से जुड़े मामलों और मौतों में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। हालांकि शोधकर्ताओं ने यह भी कहा है कि इस विषय पर और वैज्ञानिक अध्ययन की आवश्यकता है।

इधर भारत में खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी एफएसएसएआई ने कुछ कंपनियों को भ्रामक लेबल और पैकेजिंग दावों के मामले में नोटिस जारी किए हैं। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को सही जानकारी उपलब्ध कराना और खाद्य लेबलिंग में पारदर्शिता बढ़ाना है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि रोजमर्रा के भोजन में ताजे फल, हरी सब्जियां, दालें, साबुत अनाज, दूध और पर्याप्त पानी को प्राथमिकता दें। साथ ही पैकेटबंद और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित रखें तथा नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद को भी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।

स्वस्थ रहने का सबसे आसान तरीका है—थाली में संतुलन और जीवनशैली में अनुशासन। इसलिए अगली बार कोई पैकेटबंद खाद्य पदार्थ खरीदने से पहले उसका लेबल जरूर पढ़ें और सोच-समझकर अपने खानपान का चुनाव करें।

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