सरकार ने रविवार को घोषणा की कि भारत ने अपनी पहली स्वदेशी हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन बनाकर सस्टेनेबल ट्रांसपोर्टेशन (टिकाऊ परिवहन) के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। यह कदम देश में हाइड्रोजन से चलने वाले रेल इकोसिस्टम को बनाने और क्लीन मोबिलिटी (स्वच्छ परिवहन) के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम है। हाइड्रोजन से चलने वाली यह ट्रेन नॉर्दर्न रेलवे के जींद-सोनीपत सेक्शन पर चलेगी। इसे भारत में ही स्वदेशी तकनीक का इस्तेमाल करके डिज़ाइन, इंजीनियर और इंटीग्रेट किया गया है।
2,600 यात्रियों की क्षमता वाली यह ट्रेन पारंपरिक डीजल-संचालित रेल परिवहन के स्वच्छ विकल्प के तौर पर हाइड्रोजन की क्षमता को दिखाएगी। आधिकारिक बयान के अनुसार, "नॉर्दर्न रेलवे के जींद-सोनीपत सेक्शन पर चलने वाली भारत की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन की क्षमता 2,600 यात्रियों की है।" प्रोटॉन एक्सचेंज मेम्ब्रेन फ्यूल सेल (PEMFC) से चलने वाली यह ट्रेन प्रोटॉन-कंडक्टिंग परफ्लूरोसल्फोनिक एसिड (PFSA) पॉलीमर मेम्ब्रेन के आर-पार हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के बीच केमिकल रिएक्शन के ज़रिए बिजली पैदा करती है।
इस प्रक्रिया में बाय-प्रोडक्ट के तौर पर सिर्फ़ जल वाष्प (water vapour) और गर्मी निकलती है, जिससे यह ट्रेन ज़ीरो-एमिशन (शून्य उत्सर्जन) और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन का साधन बन जाती है। बयान में आगे कहा गया, "प्रोटॉन एक्सचेंज मेम्ब्रेन (PEM) फ्यूल सेल से चलने के कारण, इसमें बाय-प्रोडक्ट के तौर पर सिर्फ़ जल वाष्प और गर्मी निकलती है, जो इसे डीजल का एक स्वच्छ और ज़ीरो-एमिशन विकल्प बनाता है।" इस ट्रेन की ऑपरेशनल स्पीड 75 किमी प्रति घंटा है, जबकि इसकी डिज़ाइन स्पीड 110 किमी प्रति घंटा है। इससे यह कार्बन उत्सर्जन को कम करते हुए क्षेत्रीय यात्री मार्गों पर कुशलतापूर्वक सेवा दे सकती है।
हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन के संचालन में मदद के लिए हरियाणा के जींद में एक खास हाइड्रोजन रीफ्यूलिंग इकोसिस्टम बनाया गया है। इस सुविधा में हाइड्रोजन का उत्पादन, भंडारण, कम्प्रेशन और वितरण का इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल है, जिससे हाइड्रोजन-आधारित रेल संचालन के लिए एक व्यापक इकोसिस्टम तैयार होता है। इस प्रोजेक्ट के विकास में सुरक्षा पर खास ध्यान दिया गया है। ट्रेन में हाइड्रोजन लीक डिटेक्टर लगे हैं जो बहुत छोटे लीकेज का भी तुरंत पता लगा सकते हैं, जिससे संभावित खतरों को रोकने और सुरक्षित संचालन सुनिश्चित करने में मदद मिलती है। स्वदेशी हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन भारतीय रेलवे के लिए सिर्फ़ एक तकनीकी उपलब्धि से कहीं बढ़कर है। यह घरेलू हाइड्रोजन रेल इकोसिस्टम की नींव रखती है और सस्टेनेबल, ज़ीरो-एमिशन ट्रांसपोर्टेशन समाधान विकसित करने के भारत के संकल्प को मज़बूत करती है।
















