गुरु ही जीवन को प्रकाश की ओर ले जाते हैं: रत्ननिधि श्री

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गुरु ही जीवन को प्रकाश की ओर ले जाते हैं: रत्ननिधि श्री

धमतरी, 29 जुलाई। धर्मनगरी धमतरी के इतवारी बाजार स्थित श्री पार्श्वनाथ जिनालय में चातुर्मास के लिए विराजित परम पूज्य रत्ननिधि श्री जी महाराज साहेब ने बुधवार को गुरु पूर्णिमा के विशेष प्रवचन में गुरु के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा श्रद्धा, कृतज्ञता और समर्पण का पर्व है। इस दिन भक्त अपने भावों को गुरु चरणों में अर्पित कर उनके उपकारों का स्मरण करते हैं। उन्होंने कहा कि दादा गुरुदेव की कृपा से ही विपरीत परिस्थितियों के बावजूद जिनशासन सुरक्षित रहा है। गुरु वर्तमान में साक्षात परमात्मा के समान हैं। गुरु और गूगल दोनों प्रश्नों का उत्तर देते हैं, लेकिन गूगल का उत्तर सभी के लिए एक जैसा होता है, जबकि गुरु शिष्य की पात्रता और आवश्यकता के अनुसार अलग-अलग मार्गदर्शन देते हैं।

गुरु अज्ञान रूपी अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाते हैं और सत्य-असत्य, अच्छे-बुरे की पहचान कराते हैं। उन्होंने कहा कि जीवन में जिनसे भी कुछ सीखा है, वे सभी किसी न किसी रूप में गुरु हैं। माता प्रथम गुरु होती हैं, विद्यालय में शिक्षक शिक्षा देते हैं, पिता जीवनोपयोगी कौशल सिखाते हैं और धर्मगुरु आत्मकल्याण का मार्ग बताते हैं। उन्होंने कहा कि गुरु के बिना सफलता और आत्मोन्नति संभव नहीं है। आगे उन्होंने अपनी गुरु स्नेहयशा श्री जी महाराज साहेब के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि गुरु का स्नेह और मार्गदर्शन जीवन को सार्थक बनाता है तथा उनकी कृपा से ही जीवन के परम लक्ष्य की प्राप्ति संभव है। इस अवसर पर विमल पारख, कुशल चोपड़ा, मनोज कटारिया, पुष्पा गोलछा, नेहा पारख, माया गोलछा, किरण गोलछा, सरिता राखेचा, सरोज पारख, योगिता बरड़िया, श्वेता लोढ़ा, वर्षा राखेचा, राखी संकलेचा और शशि पारख ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन रूपल लोढ़ा एवं मनीषा कटारिया ने किया।

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