मछली बीज उत्पादन से आत्मनिर्भर बनी मनकी, बढ़ा रही परिवार की आमदनी

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मछली बीज उत्पादन से आत्मनिर्भर बनी मनकी, बढ़ा रही परिवार की आमदनी

छत्तीसगढ़ शासन के मत्स्य पालन विभाग की स्पान संवर्धन योजना बस्तर जिले के ग्रामीणों के लिए आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन रही है। योजना का लाभ उठाकर बस्तर विकासखंड के ग्राम सिवनी की महिला मत्स्य कृषक मनकी बघेल ने महज दो महीने में 15 हजार रुपये की अतिरिक्त आय अर्जित की है। अब वह अंगुलिका उत्पादन का दायरा बढ़ाकर आमदनी में और इजाफा करने की तैयारी कर रही हैं।

मत्स्य पालन विभाग के अनुसार, स्पान संवर्धन योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर मछली बीज उत्पादन को बढ़ावा देना, मत्स्य कृषकों को वैज्ञानिक पद्धति से प्रशिक्षण देना और उनकी आय में वृद्धि करना है। योजना के तहत किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले मछली बीज (स्पान), नर्सरी जाल तथा तालाब प्रबंधन, स्पान संवर्धन और जल गुणवत्ता बनाए रखने का प्रशिक्षण निःशुल्क उपलब्ध कराया जाता है।

मई 2026 में विभाग ने मनकी बघेल को मिश्रित प्रजाति के लगभग 25 हजार स्पान उपलब्ध कराए। साथ ही तालाब की उर्वरता बढ़ाने के लिए खाद और खल्ली भी दी गई। मनकी ने अपने परिवार के एक एकड़ क्षेत्र में फैले दो तालाबों में स्पान का संवर्धन किया। नियमित देखभाल और वैज्ञानिक प्रबंधन के चलते कम समय में उच्च गुणवत्ता की मत्स्य अंगुलिकाएं तैयार हो गईं। विभाग ने तैयार मत्स्य बीज के विपणन के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर, पॉलीथीन बैग, बोरी और जाल भी निःशुल्क उपलब्ध कराए।

मनकी बघेल के भतीजे सुखलाल बघेल ने बताया कि अब तक करीब 30 किलोग्राम मत्स्य अंगुलिकाएं 500 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेची जा चुकी हैं, जिससे परिवार को 15 हजार रुपये की अतिरिक्त आय हुई है। तालाब में अभी लगभग 50 किलोग्राम अंगुलिकाएं बिक्री के लिए तैयार हैं, जिनसे आगे भी अच्छी आमदनी की उम्मीद है।

बघेल परिवार 7 एकड़ भूमि में धान, मक्का और सब्जियों की खेती भी करता है। मत्स्य पालन से मिली सफलता से उत्साहित परिवार ने अगले वर्ष अंगुलिका उत्पादन का विस्तार करने का निर्णय लिया है, ताकि खेती के साथ मत्स्य पालन को भी आय का मजबूत आधार बनाया जा सके।

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