नेपाल को मिलने वाली विदेशी सहायता घटने पर वित्तमंत्री ने जताई चिंता


विदेश 21 August 2026
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नेपाल को मिलने वाली विदेशी सहायता घटने पर वित्तमंत्री ने जताई चिंता

काठमांडू, 21 अगस्त  नेपाल के वित्तमंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले ने देश में विदेशी सहायता लगातार घटने पर चिंता व्यक्त की है। संसदीय सार्वजनिक लेखा समिति की बैठक में उन्होंने कहा कि हाल के समय में अनुदान और रियायती ऋण के स्रोत लगातार सीमित होते जा रहे हैं। विदेशी सहायता में कमी के बाद अब वैकल्पिक रूप से निजी पूंजी जुटाने की स्थिति पैदा हो गई है।

उन्होंने कहा, “40 वर्षों तक 1 से 1.5 प्रतिशत ब्याज दर पर मिलने वाले और शुरुआती आठ वर्षों तक भुगतान न करने वाले अत्यधिक रियायती ऋण की खिड़की अब बंद हो रही है। मैं आज वित्त मंत्री की कुर्सी पर हूं और मुझे चिंता है कि यह खिड़की और दरवाजे अब बंद होते जा रहे हैं।”

वागले ने बताया कि नेपाल अपने पहले बजट से ही राजस्व से पूरा नहीं होने वाले खर्च को विदेशी सहायता और ऋण के माध्यम से पूरा करता आया है। हालांकि, बजट का आकार बढ़ने के साथ कुल बजट में विदेशी अनुदान का हिस्सा तुलनात्मक रूप से घटता गया है। वाग्ले के अनुसार, चालू बजट में नेपाल ने करीब 2 खरब 12 अरब नेपाली रुपये विदेशी ऋण लेने का लक्ष्य रखा है, जबकि विदेशी अनुदान करीब 62 अरब रुपये रहने का अनुमान है।

उन्होंने बताया कि पिछले वर्षों में बजट में 48 से 52 अरब रुपये तक विदेशी अनुदान प्राप्त होने का अनुमान लगाया जाता रहा है, लेकिन वास्तविक रूप से प्राप्त राशि लगभग 10 से 15 अरब रुपये तक ही सीमित रही है। उन्होंने कहा कि आईएनजीओ के माध्यम से आने वाली सहायता भी घट रही है और नेपाल के बजट तथा अर्थव्यवस्था के आकार की तुलना में उसका हिस्सा अब काफी छोटा हो चुका है।

वाग्ले ने कहा कि बड़े बुनियादी ढांचे और बड़े संस्थानों के पुनर्गठन में उपयोग किए जा सकने वाले रियायती संसाधन अब अधिक कठोर शर्तों के साथ उपलब्ध हो रहे हैं। ब्याज दर बढ़ रही है, ग्रेस पीरियड और ऋण की परिपक्वता अवधि घट रही है तथा सीमित संसाधनों के लिए प्रतिस्पर्धा भी बढ़ रही है। उन्होंने इसे नेपाल के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण चरण बताया।

वित्तमंत्री ने बताया कि नेपाल को भारत, चीन, ब्रिटेन, जापान और अमेरिका सहित विभिन्न देशों से द्विपक्षीय अनुदान प्राप्त होता रहा है। इसके अलावा, बहुपक्षीय विकास साझेदारों से मिलने वाला रियायती ऋण भी नेपाल के विकास के लिए महत्वपूर्ण स्रोत है। उन्होंने कहा कि एशियाई विकास बैंक (एडीबी) और विश्व बैंक से मिलने वाले ऋण में लंबी अवधि, कम ब्याज दर और ग्रेस पीरियड जैसी सुविधाएं होती हैं। लेकिन अब ऐसे रियायती स्रोत धीरे-धीरे सीमित होते जा रहे हैं।

वाग्ले ने यह भी स्वीकार किया कि नेपाल अतीत में उपलब्ध रियायती संसाधनों का प्रभावी उपयोग नहीं कर सका। उनके अनुसार, सहायता उपलब्ध होने के बावजूद कमजोर खर्च क्षमता, खरीद प्रक्रिया और अन्य कारणों से पूंजीगत खर्च अपेक्षा के अनुरूप नहीं हो सका। उन्होंने कहा, “जो रकम आई, उसे भी हम खर्च नहीं कर सके। रकम उपलब्ध थी और देने के लिए तैयार थी, लेकिन हमारी क्षमता, खरीद प्रक्रिया और अन्य कारणों से हम पूंजीगत खर्च में अपेक्षित उपलब्धि हासिल नहीं कर सके।”

उन्होंने कहा कि नेपाल के लगभग सभी महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे इन्हीं रियायती ऋणों से बने हैं। हालांकि, हाल के वर्षों में बड़े बुनियादी ढांचे और जलविद्युत परियोजनाओं में निजी क्षेत्र की पूंजी भी आने लगी है। ऐसे में पारंपरिक विदेशी सहायता के स्रोत सूखने के कारण नेपाल अब नई निजी पूंजी की ओर बढ़ रहा है। वाग्ले ने बताया कि विदेशी सहायता के स्रोत सीमित होने के बाद सरकार ने निजी और वैकल्पिक पूंजी जुटाने के लिए विभिन्न उपकरणों को आगे बढ़ाया है। इनमें हाइब्रिड एन्युटी मॉडल, ऑफशोर बॉन्ड, डायस्पोरा निवेश और वैकल्पिक विकास वित्त से संबंधित व्यवस्थाएं शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि एशियाई विकास बैंक और अंतरराष्ट्रीय वित्त निगम के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय बाजार से पूंजी जुटाकर नेपाली बैंकों के जरिए निजी क्षेत्र को ऋण उपलब्ध कराने का रास्ता भी खोला गया है। वाग्ले के अनुसार, गैर-आवासीय नेपाली के निवेश को आसान बनाने के लिए मौजूदा कानूनी और नियामकीय बाधाओं को हटाया गया है। इसके साथ ही वैकल्पिक विकास वित्त से संबंधित कानून भी संसद से पारित हो चुका है।

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