हॉर्मुज पर बातचीत की उम्मीद से कच्चा तेल नरम, सेंसेक्स-निफ्टी में हल्की बढ़त


व्यापार 27 August 2026
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हॉर्मुज पर बातचीत की उम्मीद से कच्चा तेल नरम, सेंसेक्स-निफ्टी में हल्की बढ़त

ईरान और ओमान के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने को लेकर बातचीत की उम्मीद के चलते कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई, जिससे गुरुवार को शुरुआती कारोबार में भारतीय शेयर बाजार में हल्की बढ़त दर्ज की गई।

सुबह 9:18 बजे सेंसेक्स 81 अंक यानी 0.10 प्रतिशत बढ़कर 77,553 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 37 अंक यानी 0.16 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,425 पर रहा।

प्रमुख व्यापक बाजार सूचकांकों ने भी बेंचमार्क सूचकांकों के अनुरूप प्रदर्शन किया। निफ्टी मिडकैप 100 में 0.31 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 0.24 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।

एनएसई के सभी सेक्टोरल इंडेक्स हरे निशान में कारोबार कर रहे थे, केवल निफ्टी मीडिया में गिरावट रही। निफ्टी आईटी 0.42 प्रतिशत की बढ़त के साथ सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला क्षेत्र रहा।

ईरान द्वारा ओमान के साथ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़े समझौते को अंतिम रूप देने के लिए बातचीत की जानकारी दिए जाने के बाद ब्रेंट क्रूड 0.6 प्रतिशत गिरकर 87.30 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। इससे पश्चिम एशिया में लंबे समय तक तेल आपूर्ति बाधित रहने की आशंका कम हुई है।

निकट अवधि में बाजार का रुझान सतर्क और सीमित दायरे में रहने की संभावना है। मिश्रित एशियाई बाजार और कमजोर वैश्विक संकेत निवेशकों को सतर्क रख रहे हैं।

निवेशकों का ध्यान महंगाई, बॉन्ड यील्ड और जारी भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर बना हुआ है, जबकि कच्चे तेल की कीमतों में नरमी भारतीय शेयर बाजार को कुछ समर्थन दे सकती है।

एशियाई बाजारों में चीन का शंघाई इंडेक्स 0.63 प्रतिशत और शेनझेन 1.17 प्रतिशत चढ़ा। जापान का निक्केई 0.15 प्रतिशत गिरा, जबकि हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स 0.47 प्रतिशत नीचे रहा। दक्षिण कोरिया का कोस्पी 2.01 प्रतिशत बढ़ा।

इससे पहले बुधवार रात वॉल स्ट्रीट में कारोबार मिश्रित से कमजोर रहा। निवेशकों ने एनवीडिया के नतीजों और अमेरिका में महंगाई को लेकर फिर उभरी चिंताओं का आकलन किया। शुरुआती एशियाई बाजारों में हालांकि ज्यादातर बाजार बढ़त के साथ कारोबार कर रहे हैं।

अमेरिकी बाजारों में नैस्डैक 0.08 प्रतिशत, एसएंडपी 500 0.02 प्रतिशत और डॉव जोन्स 0.21 प्रतिशत गिरकर बंद हुए।

26 अगस्त को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय शेयरों में 502 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने 6,425 करोड़ रुपये की खरीदारी की।

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