सीएसआईआर-एनएएल ने स्वदेशी छोटे गैस टर्बाइन इंजन किए पेश, मानवरहित रक्षा क्षमताओं को मिलेगी मजबूती


विज्ञान 26 August 2026
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सीएसआईआर-एनएएल ने स्वदेशी छोटे गैस टर्बाइन इंजन किए पेश, मानवरहित रक्षा क्षमताओं को मिलेगी मजबूती

सीएसआईआर-राष्ट्रीय एयरोस्पेस प्रयोगशाला (सीएसआईआर-एनएएल) ने मंगलवार को नई दिल्ली स्थित सीएसआईआर मुख्यालय में तीन स्वदेशी अत्यंत छोटे और लघु गैस टर्बाइन इंजन पेश किए। इनमें 5 किलोग्राम थ्रस्ट वाला एनजे-05, 50 किलोग्राम थ्रस्ट वाला एनजे-50 और 100 किलोग्राम थ्रस्ट वाला एनजे-100 शामिल हैं। इन प्रणोदन प्रणालियों को सामरिक मानवरहित हवाई वाहनों (यूएवी), ड्रोन इंटरसेप्टर और सघन मिसाइल प्रणालियों समेत विभिन्न रक्षा अनुप्रयोगों के लिए विकसित किया गया है। इसे उन्नत एयरोस्पेस प्रणोदन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

रक्षा और वैज्ञानिक नेतृत्व की मौजूदगी

लघु गैस टर्बाइन इंजन के अनावरण कार्यक्रम में वरिष्ठ रक्षा और वैज्ञानिक नेतृत्व ने हिस्सा लिया। चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी के अध्यक्ष और एकीकृत रक्षा स्टाफ प्रमुख एयर मार्शल तेजिंदर सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। सीएसआईआर की महानिदेशक और वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान विभाग की सचिव डॉ. एन. कलाइसेल्वी तथा सीएसआईआर-एनएएल के निदेशक डॉ. अभय ए. पशिलकर भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।

ड्रोन पारितंत्र में बढ़ेगी स्वदेशी भूमिका

सीएसआईआर-एनएएल के निदेशक डॉ. अभय ए. पशिलकर ने कहा कि देश के तेजी से बढ़ते ड्रोन पारितंत्र में संस्थान की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण हो रही है। उन्होंने कहा कि भारतीय उद्योग और एयरोस्पेस स्टार्टअप पारितंत्र में इन उन्नत इंजनों के बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए क्षमता विकसित करने की संभावना है, जिससे देश की रक्षा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।

उच्च-आरपीएम टर्बोमशीनरी और दहन तकनीक पर काम

सीएसआईआर-एनएएल की वैज्ञानिक टीम ने गैस टर्बाइन इंजनों के विकास पर तकनीकी प्रस्तुति दी। श्री आर. प्रथापनायका के नेतृत्व वाली टीम ने उच्च-आरपीएम टर्बोमशीनरी और उच्च-तापमान दहन प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हुई प्रगति की जानकारी दी। इन्हीं तकनीकी क्षमताओं के आधार पर स्वदेशी प्रणोदन प्रणालियों को विकसित किया गया है।

आत्मनिर्भर एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की दिशा में उपलब्धि

सीएसआईआर की महानिदेशक डॉ. एन. कलाइसेल्वी ने परियोजना दल के सहयोगात्मक प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि अत्यधिक विशिष्ट और महत्वपूर्ण उप-प्रणालियों का स्वदेशी विकास एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में उल्लेखनीय उपलब्धि है।

राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए रणनीतिक महत्व

एयर मार्शल तेजिंदर सिंह ने उन्नत गैस टर्बाइन इंजन तकनीकों के स्वदेशी विकास के रणनीतिक महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसी महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों में स्वदेशी क्षमता हासिल होने से राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होगी और सशस्त्र बलों की तकनीकी आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।

यूएवी और ड्रोन क्षेत्र को मिलेगा लाभ

एनजे-05, एनजे-50 और एनजे-100 का सफल विकास लघु गैस टर्बाइन प्रणोदन प्रणालियों के डिजाइन, विकास और निर्माण के लिए स्वदेशी पारितंत्र तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। घरेलू विनिर्माण क्षमताओं के साथ इन तकनीकों से भारत के बढ़ते यूएवी, ड्रोन और रक्षा एयरोस्पेस पारितंत्र को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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