भू-राजनीतिक
तनाव बढ़ने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल का असर
बुधवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। घरेलू बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स
और निफ्टी ने 2 सितंबर
को बड़ी गिरावट के साथ कारोबार की शुरुआत की। शुरुआती कारोबार में निवेशकों के बीच
जोखिम से बचने की प्रवृत्ति दिखाई दी और कई प्रमुख सेक्टरों में बिकवाली का दबाव
बना रहा। शुरुआती सत्र में बीएसई सेंसेक्स 472.96 अंक यानी 0.61
प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,471.32 पर खुला।
वहीं एनएसई निफ्टी 50 करीब 197.80 अंक
यानी 0.82 प्रतिशत टूटकर 23,858 के
स्तर पर खुला। कारोबार आगे बढ़ने के साथ बिकवाली और तेज हुई और सेंसेक्स की गिरावट
600 से 700 अंक के आसपास पहुंच गई।
बाजार में कमजोरी की सबसे बड़ी वजह
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच सैन्य
गतिविधियां तेज होने से पश्चिम एशिया में स्थिति को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ी
है। खासतौर पर कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका ने वैश्विक बाजारों पर
दबाव बढ़ा दिया है। इसका असर एशियाई शेयर बाजारों में भी देखने को मिला।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 95 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। बुधवार के शुरुआती
कारोबार में ब्रेंट क्रूड करीब 95.91 डॉलर प्रति बैरल के
आसपास रहा, जबकि कुछ वायदा भाव 96 डॉलर
के ऊपर पहुंच गए। तेल की बढ़ती कीमतें भारत के लिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि देश
अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का आयात करता
है। तेल महंगा होने से आयात बिल बढ़ने के साथ महंगाई का दबाव भी बढ़ सकता है।
वैश्विक बॉन्ड बाजार में बढ़ती यील्ड ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। अमेरिकी 10
वर्षीय ट्रेजरी यील्ड करीब 4.81 प्रतिशत तक
पहुंच गई। ऊंची बॉन्ड यील्ड के कारण शेयर बाजार जैसे जोखिम वाले निवेश विकल्पों का
आकर्षण कम हो सकता है। इससे विदेशी निवेशकों की ओर से उभरते बाजारों में निवेश को
लेकर सतर्कता बढ़ने की आशंका है।
एशियाई बाजारों में भी
भारी कमजोरी रही। दक्षिण कोरिया का कोस्पी 3 प्रतिशत से अधिक और जापान का निक्केई करीब 2.6 प्रतिशत
नीचे कारोबार करता दिखाई दिया। इससे पहले अमेरिकी बाजारों में भी गिरावट दर्ज की
गई थी। वैश्विक स्तर पर महंगाई और ब्याज दरों को लेकर नई चिंताओं ने बाजार की
धारणा को कमजोर किया है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले सत्रों में कच्चे
तेल की चाल और पश्चिम एशिया के घटनाक्रम भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करने में
अहम भूमिका निभा सकते हैं। यदि तेल की कीमतों में तेजी जारी रहती है तो रुपये,
महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में निवेशकों
की नजर अमेरिका-ईरान तनाव के साथ वैश्विक बॉन्ड यील्ड और विदेशी निवेशकों की
गतिविधियों पर भी बनी रहेगी।
कच्चा तेल महंगा होते ही शेयर बाजार में गिरावट
















