BRICS Summit: भारत को ग्लोबल साउथ के संबंधों को व्यापार, निवेश वृद्धि में बदलना चाहिए: इंडस्ट्री


देश 09 September 2026
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BRICS Summit: भारत को ग्लोबल साउथ के संबंधों को व्यापार, निवेश वृद्धि में बदलना चाहिए: इंडस्ट्री

फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (फियो) ने बुधवार को कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में होने वाला आगामी 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन भारत के लिए ग्लोबल साउथ के साथ बढ़ते रणनीतिक जुड़ाव को निर्यात, निवेश, प्रौद्योगिकी और मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं के रूप में लाभ में बदलने का बड़ा अवसर है।

फियो ने कहा कि 12-13 सितंबर को होने वाले इस शिखर सम्मेलन में कारोबारियों के लिए कुछ व्यावहारिक परिणामों पर ध्यान दिया जाना चाहिए। इनमें सीमा शुल्क प्रक्रियाओं में तेजी, गैर-टैरिफ बाधाओं में कमी, अधिक नियामकीय पारदर्शिता, मानकों और अनुरूपता मूल्यांकन की पारस्परिक मान्यता, बेहतर लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी, डिजिटल व्यापार दस्तावेज और सीमा पार भुगतान को आसान बनाना शामिल हैं।

फियो के अध्यक्ष एससी रहलान ने कहा, “ब्रिक्स को रणनीतिक संवाद से आगे बढ़कर ऐसे वाणिज्यिक परिणामों पर ध्यान देना चाहिए जिन्हें मापा जा सके। भारतीय कारोबारियों के लिए इसकी वास्तविक उपयोगिता आसान बाजार पहुंच, मजबूत आपूर्ति श्रृंखला साझेदारी, निवेश प्रवाह, प्रौद्योगिकी सहयोग और कुशल भुगतान तंत्र में होगी।”

रहलान ने आगे कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच बेहतर सहयोग से भारत की महत्वपूर्ण खनिजों, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, पूंजी और नई विनिर्माण साझेदारियों तक पहुंच बेहतर हो सकती है। रहलान ने कहा कि भारत के पास इंजीनियरिंग सामान, फार्मास्यूटिकल्स, रसायन, कपड़ा और परिधान, ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, खाद्य एवं कृषि उत्पाद, नवीकरणीय ऊर्जा, स्वास्थ्य सेवा और डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र में काफी अवसर हैं।

एशिया, अफ्रीका, खाड़ी, लैटिन अमेरिका और यूरेशिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं तक फैला विस्तारित ब्रिक्स समूह भारतीय निर्यातकों को काफी व्यापक आर्थिक पहुंच प्रदान करता है। ब्रिक्स अर्थव्यवस्थाएं संयुक्त रूप से वैश्विक व्यापार में करीब 26 प्रतिशत हिस्सेदारी रखती हैं, जिससे भारत को अपने पारंपरिक बाजारों से आगे निर्यात में विविधता लाने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच मिलता है।

उन्होंने कहा, “अवसर केवल ब्रिक्स देशों को अधिक सामान बेचने का नहीं है। भारत को इन अर्थव्यवस्थाओं में विकसित हो रही उत्पादन, सोर्सिंग और वैल्यू चेन का अभिन्न हिस्सा बनना चाहिए।” रहलान ने स्थानीय मुद्राओं में ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार के अधिक निपटान के लिए व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य तंत्र विकसित करने के महत्व पर जोर दिया।

उन्होंने कहा, “भुगतान को लेकर अनिश्चितता खुद एक व्यापार बाधा बन सकती है। कुशल, पारदर्शी और नियमों के अनुरूप भुगतान व्यवस्था लेनदेन की लागत कम कर सकती है और खासकर एमएसएमई सहित कारोबारियों का नए बाजारों में प्रवेश को लेकर भरोसा बढ़ा सकती है।” फियो ने ब्रिक्स के भीतर कारोबारियों के बीच संबंधों को मजबूत करने के लिए एक बेहतर बिजनेस-टू-बिजनेस व्यवस्था की भी मांग की। इसमें क्षेत्र-विशेष के खरीदार-विक्रेता सम्मेलन, निवेश के लिए साझेदार तलाशने की व्यवस्था, तकनीकी साझेदारी, संयुक्त उद्यम और नियमित व्यापार प्रतिनिधिमंडल शामिल हैं।

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