दिल्ली: वैश्विक कॉर्पोरेट रणनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जिसमें यूरोपीय मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEOs) भारत के प्रति अत्यधिक उत्साह दिखा रहे हैं और इसे चीन व अन्य प्रमुख वैश्विक बाजारों पर प्राथमिकता दे रहे हैं। द कॉन्फ्रेंस बोर्ड और यूरोपियन राउंड टेबल फॉर इंडस्ट्री द्वारा प्रकाशित हालिया संयुक्त रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट में शामिल सर्वेक्षण में यह पाया गया कि 63 प्रतिशत यूरोपीय उद्योग नेता भारत के दीर्घकालिक व्यापार परिदृश्य को सकारात्मक दृष्टिकोण से देखते हैं, जबकि 7 प्रतिशत ने इसे बहुत सकारात्मक” बताया। केवल 4 प्रतिशत ने भारत के बाजार को नकारात्मक रूप में देखा।
इस आंकड़े से स्पष्ट होता है कि यूरोपीय उद्योग जगत में भारत के लिए आशावाद की लहर है, जिसने वैश्विक व्यापारिक और भूराजनीतिक प्राथमिकताओं में बदलाव लाया है। सर्वेक्षण से यह भी पता चला कि 58 प्रतिशत उत्तरदाताओं का मानना है कि यूरोपीय संघ को व्यापार, निवेश, आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन, प्रौद्योगिकी, सुरक्षा और जलवायु ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भारत के साथ अपने संबंधों को उच्चतम प्राथमिकता देनी चाहिए। इसका मतलब है कि यूरोप के उद्योग और नीति निर्माता भारत को अपनी रणनीतिक योजनाओं में केंद्र में रख रहे हैं। यह प्राथमिकता दर यूरोप की बाहरी रणनीति में भारत को शीर्ष पर रखती है। यूरोप ने संयुक्त राज्य अमेरिका को 53 प्रतिशत प्राथमिकता रेटिंग दी है, जबकि चीन को 42 प्रतिशत प्राथमिकता दी गई है।
इस आंकड़े से स्पष्ट है कि भारत को यूरोप के लिए चीन और अमेरिका के मुकाबले ज्यादा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रिपोर्ट का विश्लेषण बताता है कि भारत के तेजी से बढ़ते उपभोक्ता बाजार, डिजिटल और तकनीकी क्षमताएं, निवेश अनुकूल नीति और स्थिर राजनीतिक माहौल ने यूरोपीय निवेशकों को आकर्षित किया है। कई प्रमुख उद्योग समूह भारत में उत्पादन, R&D और साझेदारी के अवसरों को बढ़ावा देने की योजना बना रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भी महत्वपूर्ण प्रभाव डालेगा। यूरोपीय कंपनियां चीन पर निर्भरता कम करके भारत और अन्य एसियाई बाजारों में निवेश बढ़ा रही हैं।
इसके अलावा, भारत के साथ मजबूत संबंध से यूरोपीय कंपनियों को जलवायु ऊर्जा, तकनीकी नवाचार और सुरक्षा क्षेत्रों में भी रणनीतिक लाभ मिलेगा। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि यूरोपीय CEOs ने भारत में निवेश बढ़ाने के लिए दीर्घकालिक योजनाओं पर ध्यान केंद्रित किया है, जिसमें उत्पादन विस्तार, लॉजिस्टिक नेटवर्क सुदृढ़ करना और डिजिटल प्रौद्योगिकी में सहयोग शामिल हैं। इस सर्वेक्षण से यह स्पष्ट हो गया है कि भारत यूरोप की बाहरी रणनीति में महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है और भविष्य में दोनों पक्षों के बीच व्यापार, तकनीकी और सुरक्षा सहयोग के अवसर और बढ़ सकते हैं।









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