खाने में दाल, राजमा, सोयाबीन और अन्य पौधों से मिलने वाले प्रोटीन स्रोतों को शामिल करना सेहत के लिए फायदेमंद हो सकता है। एक नई स्टडी में सामने आया है कि प्लांट बेस्ड प्रोटीन का नियमित सेवन हाई ब्लड प्रेशर (High Blood Pressure) के खतरे को कम करने में मदद कर सकता है। शोध के अनुसार, पर्याप्त मात्रा में प्लांट प्रोटीन लेने वाले लोगों में हाई BP का जोखिम लगभग 19% तक कम पाया गया। प्लांट प्रोटीन क्यों है फायदेमंद? दाल, राजमा, छोले, सोयाबीन, टोफू और अन्य फलियों में प्रोटीन के साथ-साथ फाइबर, पोटैशियम, मैग्नीशियम और कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं।
ये पोषक तत्व शरीर में रक्तचाप को नियंत्रित रखने और हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, पौधों से मिलने वाले प्रोटीन स्रोत आमतौर पर संतृप्त वसा (Saturated Fat) में कम होते हैं, जिससे हृदय पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। दाल और फलियां खाने से कैसे कम हो सकता है BP? डाइट में दाल, राजमा और सोया उत्पाद शामिल करने से शरीर को कई तरह के फायदे मिल सकते हैं— फाइबर की मात्रा बढ़ती है, जो कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण में मदद कर सकता है। पोटैशियम और मैग्नीशियम रक्त वाहिकाओं को स्वस्थ रखने में सहायक होते हैं। पौधों का प्रोटीन वजन प्रबंधन में मदद कर सकता है। सूजन (Inflammation) से जुड़े जोखिमों को कम करने में सहायता मिल सकती है। इन सभी कारणों से ब्लड प्रेशर संतुलित रहने में मदद मिल सकती है।
किन चीजों को डाइट में करें शामिल? हाई BP के खतरे को कम करने वाली संतुलित डाइट में इन चीजों को शामिल किया जा सकता है— 1. दालें मसूर दाल मूंग दाल अरहर दाल चना दाल 2. फलियां राजमा छोले लोबिया काले चने 3. सोया उत्पाद सोयाबीन टोफू सोया चंक्स 4. अन्य पौध आधारित स्रोत मूंगफली बादाम बीज (Seeds) सिर्फ प्रोटीन नहीं, पूरी डाइट का रखें ध्यान विशेषज्ञों का कहना है कि केवल एक खाद्य पदार्थ बढ़ाने से स्वास्थ्य में बड़ा बदलाव नहीं आता। हाई BP को नियंत्रित रखने के लिए पूरी जीवनशैली महत्वपूर्ण होती है।
इसके लिए— नमक का सेवन सीमित रखें। फल और सब्जियों की मात्रा बढ़ाएं। नियमित व्यायाम करें। पर्याप्त नींद लें। धूम्रपान और अत्यधिक शराब से बचें। हाई BP से बचाव क्यों जरूरी है? उच्च रक्तचाप को अक्सर "साइलेंट किलर" कहा जाता है, क्योंकि कई बार इसके शुरुआती लक्षण दिखाई नहीं देते। लंबे समय तक BP बढ़ा रहने से हृदय रोग, स्ट्रोक और किडनी संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए खानपान में छोटे बदलाव भी लंबे समय में स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।

















