काबुल, 13 अगस्त अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने रूस को भारत से जोड़ने वाले संभावित रेल मार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित करने का भरोसा जताया है। तालिबान के आर्थिक मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल रहमान हबीब ने कहा कि अफगानिस्तान अपनी रणनीतिक भौगोलिक स्थिति के कारण इस परियोजना में अहम भूमिका निभा सकता है और इससे देश में रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
रूस की अंतरराष्ट्रीय समाचार टेलीविजन नेटवर्क रशिया टुडे (आरटी) को दिए एक साक्षात्कार में हबीब ने कहा कि अफगानिस्तान ऐसे प्रोजेक्ट्स का समर्थन करता है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित रेल परियोजना देश के लिए आर्थिक गतिविधियां बढ़ाने और रोजगार पैदा करने का अवसर हो सकती है।
रूस के उप प्रधानमंत्री मरात खुसनुलिन ने पिछले सप्ताह भारत तक रेल संपर्क विकसित करने का प्रस्ताव रखा था। उन्होंने कहा था कि इसका उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री परिवहन से जुड़े संभावित जोखिमों को कम करना और रूस को हिंद महासागर तक वैकल्पिक पहुंच उपलब्ध कराना है।
खुसनुलिन ने कहा था कि भारत तक पहुंच के लिए कई विकल्पों पर विचार किया जा सकता है। इनमें तुर्कमेनिस्तान, ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के रास्ते संभावित रेलमार्ग शामिल हैं।
अफगानिस्तान प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध होने के बावजूद समुद्र तक सीधी पहुंच नहीं रखने वाला देश है। भारत और हिंद महासागर से रेल संपर्क बनने पर उसे क्षेत्रीय व्यापार और ट्रांजिट से अतिरिक्त आय हासिल करने का अवसर मिल सकता है। प्रस्तावित रेल लाइन से माल परिवहन, लॉजिस्टिक्स और सीमा पार व्यापार को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
साल 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद रूस ने अफगानिस्तान के साथ अपने आर्थिक और सुरक्षा संबंधों को बढ़ाया है। दोनों पक्षों के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक सहयोग को लेकर बातचीत भी जारी है।
मई में रूस और तालिबान सरकार के बीच एक सैन्य सहयोग समझौता हुआ था। इससे मध्य एशिया में रूस की रणनीतिक भूमिका और अफगानिस्तान के साथ सुरक्षा सहयोग को मजबूती मिलने की संभावना है।
भारत और रूस के बीच लंबे समय से मजबूत रणनीतिक और रक्षा संबंध हैं। भारत रूसी कच्चे तेल का प्रमुख खरीदार भी है। समुद्री व्यापार के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर के आसपास बढ़ते जोखिमों के बीच दोनों देशों के लिए वैकल्पिक परिवहन मार्गों की जरूरत बढ़ रही है।
भारत और रूस ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। ऐसे में रूस-अफगानिस्तान-भारत के बीच संभावित रेल कनेक्टिविटी भविष्य में व्यापार और परिवहन के लिए एक अहम विकल्प बन सकती है।
हालांकि, इस परियोजना को जमीन पर उतारने के लिए सुरक्षा, बुनियादी ढांचे, वित्तीय निवेश और क्षेत्रीय राजनीतिक परिस्थितियों से जुड़ी कई चुनौतियों का समाधान करना होगा। फिलहाल यह प्रस्ताव शुरुआती चरण में है।
रूस से भारत तक सुरक्षित रेल रूट पक्का करेगा अफ़गानिस्तान : तालिबान
















