प्रधानमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि विश्व अब भारत की नीतिगत गतिशीलता और सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में इसकी स्थिति की सराहना करता है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया युद्ध और वैश्विक व्यापार संबंधी बाधाओं के बावजूद 7.8 प्रतिशत की तिमाही वृद्धि दर हासिल करना भारत की अंतर्निहित क्षमता को दर्शाता है।
प्रधानमंत्री ने मेक इन इंडिया पहल की सफलता का भी जश्न मनाया, जिसने देश को एक बड़े आयातक से अग्रणी निर्यातक में बदल दिया है। अपने संबोधन में उन्होंने बताया कि स्मार्टफोन का निर्यात अब 25 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है, जबकि घरेलू रक्षा उत्पादन लगभग 2 लाख करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है। श्री मोदी ने यह भी उल्लेख किया कि रक्षा निर्यात, जो 2013-14 में मात्र 600 से 700 करोड़ रुपये था, अब 40 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। श्री मोदी ने जोर देकर कहा कि वे छोटे और आसान लक्ष्यों के पीछे भागने वाले व्यक्ति नहीं हैं, बल्कि देश के लिए बड़े लक्ष्य निर्धारित करने वाले और उन्हें प्राप्त करने के लिए जी जान से प्रयास करने वाले व्यक्ति हैं।
श्री मोदी ने बुनियादी ढांचे के विकास और नीति क्रियान्वयन में भारत की अभूतपूर्व गति पर भी प्रकाश डाला, जिसके तहत पहले दशकों में पूरी होने वाली परियोजनाएं अब कुछ ही वर्षों में पूरी हो रही हैं। उन्होंने कहा कि रेलवे नेटवर्क का तेजी से विद्युतीकरण और मुक्त व्यापार समझौतों की बढ़ती संख्या देश के युवाओं के लिए नए अवसर खोल रही है। उन्होंने बताया कि 1925 में भारत की पहली इलेक्ट्रिक ट्रेन चलने के बावजूद, 2014 तक केवल 30 प्रतिशत रेलवे लाइनें ही विद्युतीकृत हो पाई थीं। रेलवे लाइनों के विद्युतीकरण के लिए अपनी सरकार के प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए श्री मोदी ने कहा कि केंद्र सरकार ने मात्र 12 वर्षों में लगभग शत-प्रतिशत विद्युतीकरण हासिल कर लिया है।















