भारत के प्रमोद बिजारनिया ने शुक्रवार को नागोया सिटी मिजुहो पार्क एथलेटिक स्टेडियम में एशियन पैरा गेम्स में पुरुषों की 1500m T46 फाइनल रेस में 4:09.65 का समय लेकर सिल्वर मेडल जीता।
श्रीलंका के पुवाकपिटिकंडे पी. वाहुमपुरगे ने 4:03.25 के गेम्स रिकॉर्ड टाइम के साथ गोल्ड जीता, और भारतीय से 6.40 सेकंड आगे रहे। हालांकि, प्रमोद बाकी लोगों से आगे रहकर पोडियम पर रहे।
फिलीपींस के किंग जेम्स रेयेस ने 4:13.81 के पर्सनल बेस्ट टाइम के साथ ब्रॉन्ज़ मेडल जीता, जो विनर से 10.56 सेकंड पीछे थे।
पैरा-एथलेटिक्स में T46 क्लासिफिकेशन उन खड़े एथलीटों के लिए है जिनके ऊपरी अंगों में दिक्कत होती है, जैसे कोहनी के ऊपर या नीचे एक हाथ का कटना या कंधे या कोहनी पर असर डालने वाली इसी तरह की गंभीर फंक्शनल दिक्कत।प्रतियोगिता में श्रीलंका के पुवाकपिटिकंडे पी. वाहुमपुरगे ने शानदार दौड़ लगाते हुए गोल्ड मेडल जीता। उन्होंने 4 मिनट 3.25 सेकंड का समय दर्ज किया, जो एशियन पैरा गेम्स का नया रिकॉर्ड रहा। श्रीलंकाई खिलाड़ी ने प्रमोद से 6.40 सेकंड पहले रेस पूरी की और शीर्ष स्थान हासिल किया। वहीं, प्रमोद ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए अन्य प्रतिस्पर्धियों को पीछे छोड़कर दूसरा स्थान सुरक्षित किया और सिल्वर मेडल पर कब्जा जमाया। इस स्पर्धा में फिलीपींस के किंग जेम्स रेयेस ने भी अच्छा प्रदर्शन किया। उन्होंने 4 मिनट 13.81 सेकंड का समय निकालकर ब्रॉन्ज मेडल जीता। उनका समय व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा। इस तरह पुरुषों की 1500 मीटर टी46 स्पर्धा में श्रीलंका ने गोल्ड, भारत ने सिल्वर और फिलीपींस ने ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया। प्रमोद बिजारनिया की यह सफलता पैरा-एथलेटिक्स में भारत की बढ़ती प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को दर्शाती है। उनकी उपलब्धि उन खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा है, जो शारीरिक चुनौतियों के बावजूद खेल के मैदान में अपनी मेहनत और लगन से नई ऊंचाइयां हासिल करना चाहते हैं। पैरा-एथलेटिक्स में टी46 एक विशेष वर्गीकरण है, जिसमें ऐसे खड़े होकर प्रतिस्पर्धा करने वाले खिलाड़ी शामिल होते हैं, जिनके ऊपरी अंगों में किसी प्रकार की शारीरिक कमी या कार्यात्मक बाधा होती है। इसमें कोहनी के ऊपर या नीचे एक हाथ का कटना अथवा कंधे और कोहनी से संबंधित कुछ गंभीर कार्यात्मक समस्याएं शामिल हो सकती हैं। इस वर्गीकरण का उद्देश्य खिलाड़ियों की शारीरिक स्थिति के अनुरूप निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करना है। एशियन पैरा गेम्स जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन खिलाड़ियों को अपनी क्षमता साबित करने और देश के लिए पदक जीतने का अवसर प्रदान करते हैं। प्रमोद बिजारनिया ने सिल्वर मेडल जीतकर भारत का गौरव बढ़ाया है। उनका प्रदर्शन यह संदेश देता है कि निरंतर अभ्यास, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प के साथ अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर सफलता हासिल की जा सकती है।
















