अभिनेता राजेश कुमार ने अपनी हालिया सीरीज 'मटरगश्ती' के बारे में बात करते हुए बताया कि उनका किरदार 'प्रकाश'
मध्यम वर्गीय समाज के एक बड़े हिस्से की सोच को दर्शाता है, जहां बच्चों से माता-पिता की उम्मीदें अक्सर उनकी परवाह और चिंता से जुड़ी
होती हैं। शो को मिल रहे रिस्पॉन्स से खुश अभिनेता का मानना है कि इसकी सरल
कहानी, ऐसे किरदार जिनसे लोग खुद को जोड़ सकें, और पिता-बेटी का दिल छू लेने वाला रिश्ता दर्शकों को खूब पसंद आ रहा है।
उन्होंने इस सीरीज को मध्यम वर्गीय समाज और वहां के पारिवारिक रिश्तों की एक
खूबसूरत झलक बताया है। - 6 रबी फसलों की बंपर खरीद: MSP
भुगतान 8.36 लाख करोड़ ज़्यादा जानें देसी
उत्पाद खोजें राजनीतिक समाचार राजनीति परामर्श सेवा अपने किरदार 'प्रकाश' के बारे में बात करते हुए राजेश ने मीडिया
से कहा, "मैं प्रकाश को एक ऐसे व्यक्ति के रूप में
देखता हूँ जो लगभग 90 प्रतिशत मध्यम वर्गीय लोगों का
प्रतिनिधित्व करता है। अक्सर, जब बेटों की बात आती है,
तो माता-पिता की एक खास सोच होती है और वे चाहते हैं कि उनके बच्चे
एक तय दिशा में आगे बढ़ें। प्रकाश रूढ़िवादी नहीं हैं, लेकिन
उन्हें अपने बच्चों की चिंता रहती है। उनकी मंशा के पीछे बच्चों के प्रति उनकी
परवाह है। मेरे लिए, प्रकाश हमारे समाज का ही एक आईना
हैं।" प्रियंका चोपड़ा ने रचाई करवा चौथ की मेहंदी,
हाथों में लिखा पिया का नाम शो की सफलता पर उन्होंने कहा,
"यह देखकर बहुत अच्छा लग रहा है कि 'मटरगश्ती'
ट्रेंड कर रही है और इसे इतनी तारीफ मिल रही है। कई बार शूटिंग के
दौरान यह पता नहीं चल पाता कि दर्शकों को कोई प्रोजेक्ट कैसा लगेगा। लेकिन 'मटरगश्ती' को नेटफ्लिक्स पर जो रिस्पॉन्स मिला है,
उसने मुझे सच में हैरान कर दिया है।" उनके अनुसार, इस सीरीज की सबसे खास बात इसका सादगी भरा अंदाज है। उन्होंने कहा,
"मुझे लगता है कि कहानी की सादगी ने दर्शकों को हैरान कर दिया
है। अद्रिजा रॉय और सौम्या उनियाल ने अपने किरदारों में जो जान डाली है, वह हमें अपने आस-पास की लड़कियों में भी देखने को मिलती है। यह उनके
अनुभवों और नजरिए की एक बहुत ही सुंदर झलक है। अभिनय की सादगी, कहानी की खूबसूरती और सबसे बढ़कर, पिता और बेटी के
बीच का प्यारा रिश्ता इस शो को खास बनाता है।" - ममूटी की तस्वीर पर मचा बवाल:
वामपंथी समर्थक नाराज राजेश ने सीरीज में एक बेटी के पिता का किरदार निभाने के
बारे में भी बात की। उन्होंने बताया कि कैसे इस रोल ने उनके अभिनय में एक
व्यक्तिगत पहलू जोड़ दिया। “पिता होना निश्चित रूप से एक सार्वभौमिक भावना है। और
हाँ, मुझे अपनी ज़िंदगी में एक बेटी की कमी ज़रूर महसूस होती
है। हालाँकि, अपने दोनों बेटों के साथ मेरे व्यवहार में कभी
कोई लैंगिक भेदभाव नहीं रहा। बच्चा तो बच्चा होता है, और
बच्चे हमारी ज़िम्मेदारी हैं। मायने यह रखता है कि हम उनकी देखभाल करें, चाहे हमारे बेटी हो या बेटा,” उन्होंने कहा। अद्रिजा
के प्रदर्शन की तारीफ़ करते हुए राजेश ने कहा, “वह एक सच्ची
कलाकार हैं, जो परफॉरमेंस की हर बारीकी को समझती हैं। चूँकि
वह एक प्रशिक्षित डांसर हैं, इसलिए उनके हाव-भाव बहुत
स्वाभाविक रूप से सामने आते हैं।”
राजेश कुमार ने ‘मटरगश्ती’ को बताया समाज का आईना

















