छत्तीसगढ़ में चक्रवात ‘अर्नब’ को लेकर प्रशासन अलर्ट मोड पर है। प्रदेश के 12 जिलों में मौसम के संभावित प्रभाव को देखते हुए एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं। कई जिलों में विद्यार्थियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्कूलों को बंद रखने का निर्णय लिया गया है। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य खराब मौसम के दौरान आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पहले से तैयारी करना है। इसके साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्यों को सुचारू रूप से संचालित करने की व्यवस्था की जा रही है।
मिली जानकारी के अनुसार, सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर, कोंडागांव, बस्तर, कांकेर, धमतरी, महासमुंद, गरियाबंद, बालोद और रायपुर को अति संवेदनशील जिलों में शामिल किया गया है। इन जिलों के 763 बाढ़ प्रभावित गांवों की पहचान की गई है। इसके अलावा प्रदेश के अन्य 21 जिलों में 1,006 संवेदनशील गांव चिह्नित किए गए हैं। इस तरह कुल 1,769 गांवों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। प्रशासन ने 779 राहत शिविर तैयार रखने के निर्देश दिए हैं, जहां जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित पहुंचाया जा सकेगा। शिविरों में भोजन, पेयजल, दवाइयों और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की जाएगी
मौसम की चेतावनी को देखते हुए कई जिलों में 28 अक्टूबर को स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है। दंतेवाड़ा, बीजापुर, बालोद, कांकेर, धमतरी और राजनांदगांव सहित विभिन्न जिलों में विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए कदम उठाए गए हैं। वहीं, किसानों को धान और अन्य फसलों की कटाई फिलहाल रोकने तथा मौसम की स्थिति पर नजर रखने की सलाह दी गई है। प्रशासन ने आपात स्थिति से निपटने के लिए राहत एवं बचाव दलों को भी तैयार रहने के निर्देश दिए हैं। नागरिकों से अपील की गई है कि वे खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहें, नदी-नालों के आसपास जाने से बचें और स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। किसी भी आपात स्थिति में राज्य आपदा नियंत्रण हेल्पलाइन 1070 पर संपर्क किया जा सकता है।














