भारतीय कुश्ती के इतिहास में 31 अक्टूबर 2026 का दिन एक खास उपलब्धि के रूप में दर्ज हो गया। हरियाणा के जींद की रहने वाली महिला पहलवान मनीषा भानवाला ने सीनियर विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। वह विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतने वाली भारत की पहली महिला पहलवान बन गई हैं। कजाखस्तान के अस्ताना में खेले गए 59 किलोग्राम भारवर्ग के फाइनल में मनीषा ने अमेरिका की अबीगैल नेत्ते को 8-6 से हराकर यह बड़ी उपलब्धि हासिल की। लेकिन इस जीत की खुशी के साथ एक गहरा भावनात्मक जुड़ाव भी था। गोल्ड मेडल जीतने के बाद मनीषा ने अपने माता-पिता की तस्वीर वाली टी-शर्ट दिखाकर यह सफलता अपने दिवंगत पिता सुरेश को समर्पित की। उनके पिता का सपना था कि बेटी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए बड़ा पदक जीते और विश्व चैंपियन बने। चार साल पहले पिता के निधन के बाद अब मनीषा ने उनकी इस ख्वाहिश को पूरा कर दिया है।
मनीषा का कुश्ती तक पहुंचने का सफर आसान नहीं रहा। उनके पिता सुरेश ने ही करीब 13 साल पहले उन्हें इस खेल में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया था। वह चाहते थे कि उनकी बेटी कुश्ती में अपनी पहचान बनाए और देश के लिए पदक जीते। मनीषा के पिता का साल 2022 में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था। यह घटना उस समय हुई, जब मनीषा एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप में हिस्सा लेने के लिए मंगोलिया रवाना होने वाली थीं। पिता के निधन ने उन्हें भीतर तक तोड़ दिया था। वह कुश्ती छोड़ने तक का मन बना चुकी थीं। हालांकि परिवार और भाई रिंकू ने उन्हें संभाला और पिता के सपने को पूरा करने के लिए खेल जारी रखने की सलाह दी। इसके बाद मनीषा ने दोबारा अभ्यास शुरू किया और धीरे-धीरे अपनी मेहनत के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत पहचान बनाई
विश्व चैंपियनशिप के फाइनल में मनीषा की चुनौती भी आसान नहीं थी। मुकाबले के पहले दौर में वह अमेरिकी पहलवान से 1-6 से पिछड़ गई थीं। ऐसे समय में उनके सामने वापसी करना बड़ी चुनौती थी, लेकिन उन्होंने धैर्य नहीं खोया। अपनी रणनीति पर भरोसा रखते हुए उन्होंने मुकाबले में वापसी की और लगातार अंक हासिल किए। अंत में उन्होंने 8-6 से जीत दर्ज कर स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। इस जीत के बाद मनीषा ने अपने माता-पिता की तस्वीर वाली टी-शर्ट दर्शकों के सामने दिखाई। यह टी-शर्ट वह अपने साथ खास तौर पर लेकर गई थीं। उनका विश्वास था कि वह इस प्रतियोगिता में पदक जीतेंगी और अपनी सफलता को माता-पिता के नाम करेंगी। मनीषा ने कहा कि उनके पिता ने उन्हें सिखाया था कि कोई काम शुरू करो तो उसे पूरा करके ही छोड़ना चाहिए। उनके मुताबिक कुश्ती उनके लिए पहला और आखिरी विकल्प है, क्योंकि इसी खेल ने उन्हें पहचान और जीवन में आगे बढ़ने का रास्ता दिया है।
मनीषा की यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि एशियन गेम्स में उन्हें निराशा का सामना करना पड़ा था। वह वहां पदक जीतने की उम्मीद लेकर उतरी थीं, लेकिन जापान की पहलवान अकारी फुजिनामी के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में हार गईं। इस हार के बाद उन्होंने अपने कोच वीरेंद्र दहिया की सलाह पर विश्व चैंपियनशिप की तैयारी पर ध्यान केंद्रित किया। मनीषा ने बताया कि कोच ने उन्हें अगली प्रतियोगिता को लक्ष्य बनाने और अभ्यास, कुश्ती तकनीक तथा रिकवरी पर ध्यान देने की सलाह दी थी। विश्व चैंपियनशिप में मिली सफलता ने उनके आत्मविश्वास को नई मजबूती दी है। अब उनका लक्ष्य ओलंपिक में पदक जीतना है।















