शिमला।
वन्य जीवों की तस्करी समेत अन्य वन अपराधों के मामले से जुड़े नेटवर्क का भंडाफोड़
करने के लिए वन विभाग तैयारी में है। प्रदेश वन मुख्यालय में विभाग साइबर सैल
स्थापित करने जा रहा है। प्रदेश के अलग-अलग सर्किल से आए सुझावों पर विभाग ने सैल
को बनाने का फैसला लिया है।
इसके लिए
विभाग का विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर रहा है और इसके मंजूरी के लिए सरकार को भेजा
जाएगा। वन अधिकारियों को आईटी एक्ट में अपराधों की जांच के लिए शक्तियां नहीं हैं।
नतीजतन उपरोक्त तमाम पहलुओं को प्रस्ताव में शामिल कर वन अपराधों पर पूरी तरह से
नकेल कसने के लिए विभाग यह कदम उठाने जा रहा है। खबर की पुष्टि प्रिंसिपल चीफ
कंजरवेटर ऑफ फोरेस्ट डा. संजय सूद ने की है।
जानकारी के
अनुसार प्रदेश के विभिन्न सर्किलों ने पीसीसीएफ के समक्ष आईटी एक्ट में वन अपराधों
की जांच के लिए व्यवस्था करने का सुझाव दिया था। अधिकारियों का तर्क था कि आईटी
एक्ट में वन अधिकारियों को जांच करने के लिए शक्तियां नहीं हैं। मौजूदा समय में
अधिकतर वन अपराधों से जुड़े मामलों की जांच विभाग खुद करता है। कई मर्तबा, लॉकेशन सीडीआर, इंटरनेट व मोबाइल टॉवर का डाटा आदि
हासिल करने के लिए विभाग के पास व्यवस्था नहीं है और न ही अधिकारियों को पावर्स
है।
इन तर्कों
को पीसीसीएफ के समक्ष रखते हुए सर्किल के अधिकारियों ने इस दिशा में कदम उठाने का
आग्रह किया है। पता चला है कि इन सुझावों और अधिकारियों के तर्कों को जायज मानते
हुए प्रदेश वन मुख्यालय में तकनीकी जांच के लिए साइबर सैल स्थापित करने का निर्णय
लिया गया है।
प्रस्ताव
में विभाग के कुछ अधिकारियों को जांच की शक्तियां देने की व्यवस्था को भी शामिल
किया गया जाएगा। उधर,
प्रिंसीपल
चीफ कंजरवेटर ऑफ फोरेस्ट डा. संजय सूद का कहना है कि प्रदेश वन मुख्यालय में साइबर
सैल स्थापित करने के लिए विभाग एक प्रस्ताव तैयार कर मंजूरी को भेजने जा रहा है।
मंजूरी के बाद विभाग वन्य जीव अपराधों से जुड़े मामलों की तकनीकी जांच अपने स्तर
पर कर सकेगा।हिमाचल में वन क्षेत्र और जैव विविधता समृद्ध है। प्रदेश में तेंदुआ, हिम तेंदुआ, कस्तूरी मृग, भालू, मोनाल कई दुर्लभ वन्य जीव प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनकी सुरक्षा चुनौती बनी रहती है।














