मप्र का संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल्स पार्क बना रोजगार की गारंटी, 98 प्रतिशत विद्यार्थियों को मिला प्लेसमेंट


देश 28 July 2026
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मप्र का संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल्स पार्क बना रोजगार की गारंटी, 98 प्रतिशत विद्यार्थियों को मिला प्लेसमेंट

 मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित संत शिरोमणि ग्लोबल स्किल्स पार्क उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप कुशल मानव संसाधन तैयार करने वाला राष्ट्रीय स्तर का कौशल विकास केन्द्र बन गया है। यहां प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों का लगभग 98 प्रतिशत प्लेसमेंट हुआ है। संस्थान के 34 विद्यार्थियों का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्लेसमेंट हुआ है। इस तरह विद्यार्थियों को रोजगार उपलब्ध कराने की कसौटी पर संस्थान की उपलब्धि सराहनीय है।

जनसंपर्क अधिकारी बबीता मिश्रा ने मंगलवार को बताया कि संस्थान में देश के 13 राज्यों के युवा प्रशिक्षण ले रहे हैं। वर्ष 2025 में संस्थान ने 2000 युवाओं को प्रशिक्षण एवं सर्टिफिकेशन प्रदान किया। वर्ष 2026 में यह संख्या बढ़कर लगभग 3000 होने का अनुमान है, जबकि अगले दो वर्षों में 6000 युवाओं को प्रतिवर्ष प्रशिक्षण एवं सर्टिफिकेशन देने का लक्ष्य रखा गया है। आधुनिक तकनीक, व्यवहारिक प्रशिक्षण और उद्योगों की सहभागिता के कारण यह संस्थान युवाओं को केवल प्रशिक्षण ही नहीं, बल्कि बेहतर रोजगार पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है।

विश्वस्तरीय तकनीक, व्यवहारिक प्रशिक्षण और उद्योगों की जरूरतों पर आधारित पाठ्यक्रम

उन्होंने बताया कि ग्लोबल स्किल्स पार्क में वर्ष 2024 से सिंगापुर की प्रतिष्ठित संस्था आईटीई एजुकेशन सर्विसेज के अकादमिक एवं तकनीकी सहयोग से 09 अत्याधुनिक लॉन्ग टर्म कोर्स संचालित किए जा रहे हैं। मेक्ट्रोनिक्स, रोबोटिक्स, सीएनसी इंजीनियरिंग और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों में एक वर्षीय प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों को आधुनिक मशीनों पर व्यवहारिक अभ्यास कराया जाता है। प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल प्रमाण-पत्र देना नहीं, बल्कि युवाओं को उद्योगों की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप दक्ष बनाना है। यही कारण है कि यहां से प्रशिक्षित युवा अपनी अलग पहचान बना रहे हैं।

प्रदेश ही नहीं, देशभर के युवाओं की पहली पसंद बन रहा संस्थान

जनसंपर्क अधिकारी ने बताया कि संस्थान की गुणवत्ता का सबसे बड़ा प्रमाण यहां प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों की बढ़ती संख्या है। वर्तमान में लगभग 80 प्रतिशत विद्यार्थी आईटीआई तथा 20 प्रतिशत विद्यार्थी पॉलिटेक्निक एवं इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि से प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। लगभग 10 प्रतिशत विद्यार्थी देश के 13 विभिन्न राज्यों से यहां अध्ययन के लिए आते हैं। वर्ष 2025 में 1000 विद्यार्थियों ने लॉन्ग टर्म कोर्स में प्रवेश लिया, जबकि 1000 अभ्यर्थियों को शॉर्ट टर्म सर्टिफिकेशन प्रदान किया गया। एक ही वर्ष में 2000 युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देना संस्थान की बढ़ती क्षमता को दर्शाता है। वर्ष 2026 में यह संख्या लगभग 3000 होने का अनुमान है और अगले 2 वर्षों में इसे बढ़ाकर 6000 प्रतिवर्ष करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

उद्योगों का बढ़ता विश्वास बना सबसे बड़ी ताकत

उन्होंने बताया कि ग्लोबल स्किल्स पार्क की एक और बड़ी उपलब्धि उद्योगों का लगातार बढ़ता भरोसा है। वर्ष 2025 में पहली बार रिलायंस इंडस्ट्रीज, फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन, जेबीएम ग्रुप, एसआरएफ लिमिटेड और ट्राइडेंट ग्रुप ने अपने कर्मचारियों का प्रशिक्षण यहां कराया। ट्राइडेंट ग्रुप ने अपने कर्मियों का तकनीकी मूल्यांकन भी इसी संस्थान में कराया। इससे संस्थान को अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होने के साथ उद्योगों और प्रशिक्षण व्यवस्था के बीच मजबूत समन्वय स्थापित हुआ है। यह विश्वास इस बात का प्रमाण है कि संस्थान उद्योगों की अपेक्षाओं के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण प्रदान कर रहा है।

महिला सहभागिता और कौशल विकास के नए आयाम

उन्होंने यह भी बताया कि तकनीकी शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए भी संस्थान निरंतर प्रयास कर रहा है। गत वर्ष की तुलना में लॉन्ग टर्म कोर्स में छात्राओं की संख्या में लगभग 4 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है। गर्ल्स हॉस्टल के पूर्ण संचालन के बाद इसमें और अधिक वृद्धि की संभावना है। वहीं ग्लोबल स्किल्स पार्क प्रदेश की 10 संभागीय आईटीआई के लिए हब इंस्टीट्यूट के रूप में कार्य करते हुए विद्यार्थियों और प्रशिक्षकों को प्रशिक्षण, ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग तथा प्लेसमेंट सहायता भी प्रदान कर रहा है। इससे प्रदेशभर में कौशल विकास की गुणवत्ता को नई मजबूती मिल रही है।

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बनी पहचान

जनसंपर्क अधिकारी ने बताया कि ग्लोबल स्किल्स पार्क की कार्य प्रणाली आज अन्य राज्यों और देशों के लिए भी अध्ययन का विषय बन चुकी है। राजस्थान, गुजरात, मेघालय, उत्तरप्रदेश, छत्तीसगढ़ और असम सहित विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधिमंडलों ने यहां के प्रबंधन और प्रशिक्षण कोर्सेज का अध्ययन किया है। इसके अलावा इथियोपिया, फिलीपींस और दक्षिण कोरिया के प्रतिनिधियों ने भी संस्थान का भ्रमण किया। एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी), कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) तथा एनसीवीईटी (नेशनल काउंसिल फॉर वोकेशनल एजुकेशन एंड ट्रेनिंग) के अधिकारियों ने भी यहां की प्रशिक्षण व्यवस्था का अवलोकन किया है। यह संस्थान की बढ़ती विश्वसनीयता और गुणवत्ता का प्रमाण है।

उन्होंने बताया कि ग्लोबल स्किल्स पार्क में आने वाले वर्षों में प्रशिक्षण क्षमता को बढ़ाकर 6000 सर्टिफिकेशन प्रतिवर्ष किया जाएगा। बजाज ऑटो और द वेल्डिंग इंस्टीट्यूट का सहयोग संस्थान परिसर में विकसित किया जाएगा। उद्योगों के कर्मियों के लिए स्किल अपग्रेडेशन कार्यक्रमों का विस्तार होगा तथा महिलाओं की सहभागिता को और बढ़ावा दिया जाएगा। वर्तमान 600 सीट क्षमता वाले बॉयज़ हॉस्टल को बढ़ाकर 1800 सीट किया जाएगा। एनसीईआरटी के सहयोग से तकनीकी शिक्षकों का प्रशिक्षण, पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के सहयोग से जापानी भाषा प्रशिक्षण एवं अंतरराष्ट्रीय प्लेसमेंट, एमएसएमई के सहयोग से इन्क्यूबेशन सेंटर, एमपीएसईडीसी के सहयोग से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस लैब, एनएसडीसी स्किल सेंटर, विदेशों में रोजगार के इच्छुक युवाओं के लिए पीडीओटी सेंटर तथा सभी 09 लॉन्ग टर्म कोर्स को एनसीवीईटी से मान्यता दिलाने का काम पूरा किया जायेगा।

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