‘कन्वर्जेंस’ से बदलती है जमीनी तस्वीर, पिछड़े जिलों की सफलता बनी विकास का मॉडल: शिवराज सिंह चौहान


देश 13 October 2026
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‘कन्वर्जेंस’ से बदलती है जमीनी तस्वीर, पिछड़े जिलों की सफलता बनी विकास का मॉडल: शिवराज सिंह चौहान

प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (PMDDKY) के एक वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर नई दिल्ली के पूसा परिसर स्थित भारत रत्न सी. सुब्रह्मण्यम सभागार में राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सम्मेलन में देशभर से आए 50 से अधिक जिलों के कलेक्टर्स, वैज्ञानिकों और वरिष्ठ नीति-निर्माताओं को संबोधित किया। उन्होंने उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जिलों को सम्मानित करते हुए कहा कि जब सरकार के अलग-अलग विभाग एक दिशा में मिलकर काम करते हैं, तो पिछड़े और आकांक्षी जिले भी विकास की नई कहानी लिख सकते हैं।

‘योजना दिल्ली से नहीं, जिले से बनती है’

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना का खाका दिल्ली के दफ्तरों में बैठकर नहीं, बल्कि जिलों की वास्तविक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कलेक्टर्स ने तैयार किया है। उन्होंने अधिकारियों से हर महीने कृषि कार्ययोजना की समीक्षा करने और जहां प्रगति धीमी है, वहां अंतर-विभागीय समन्वय के जरिए गति बढ़ाने का आह्वान किया।

कृषि से जुड़े सभी क्षेत्रों को एक साथ जोड़ने पर जोर

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए केवल कृषि विभाग के प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। जल शक्ति मंत्रालय के माध्यम से सिंचाई और जल प्रबंधन, खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय के जरिए उपज की प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन, सहकारिता और किसान उत्पादक संगठनों (FPO) की ताकत के साथ पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन और एमएसएमई कौशल विकास को एक साथ जोड़ना होगा। उन्होंने कहा कि योजनाओं के इस कन्वर्जेंस से किसानों की आय में कई गुना वृद्धि की संभावनाएं बनती हैं।

16,000 वैज्ञानिकों का शोध खेतों तक पहुंचाने का आह्वान

शिवराज सिंह चौहान ने कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK), आत्मा (ATMA), कृषि विश्वविद्यालयों और आईसीएआर के करीब 16,000 वैज्ञानिकों के शोध को सीधे किसानों तक पहुंचाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान तभी सार्थक होगा, जब उसका लाभ खेत और किसान तक पहुंचे तथा आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बढ़े।

कम उत्पादकता वाले 100 जिलों पर विशेष फोकस

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत उन 100 जिलों को प्राथमिकता दी गई है, जहां उत्पादकता कम थी, फसल सघनता कम थी या संस्थागत ऋण का प्रवाह पर्याप्त नहीं था। अधिकारियों से इन जिलों में कृषि उत्पादकता और किसानों की आय बढ़ाने के लिए स्थानीय जरूरतों के अनुरूप प्रभावी रणनीति लागू करने को कहा गया।

राइस फेलो में दलहन-तिलहन और KCC विस्तार पर जोर

केंद्रीय मंत्री ने राइस फेलो यानी धान की कटाई के बाद खाली रहने वाले खेतों में दलहन और तिलहन की खेती को मिशन मोड में बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) का विस्तार करते हुए पूर्वी भारत और पिछड़े जिलों में संस्थागत ऋण का प्रवाह तेज करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि किसान के पास पर्याप्त पूंजी होगी, तभी वह उन्नत तकनीक, बेहतर बीज और कृषि इनपुट का इस्तेमाल कर पाएगा।

‘मनुष्य ठान ले तो असंभव कुछ नहीं’

अधिकारियों में उत्साह और संकल्प का भाव जगाते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मनुष्य यदि ठान ले तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। उन्होंने प्रसिद्ध पंक्ति ‘कौन कहता है कि आसमान में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों’ का उल्लेख करते हुए कलेक्टर्स से परिश्रम की पराकाष्ठा करने का आह्वान किया।।उन्होंने प्रेरक पंक्तियों के जरिए अधिकारियों को संदेश दिया कि दृढ़ इच्छाशक्ति और निरंतर प्रयास से कठिन से कठिन लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीसरे कार्यकाल में तीन गुना गति और ताकत के साथ विकास को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया है और कृषि एवं ग्रामीण विकास तंत्र इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए पूरी क्षमता से काम करेगा।

गढ़चिरोली से बांका तक, जिलों की सफलता बनी मिसाल

सम्मेलन में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जिलों को उनके अनुकरणीय कार्यों के लिए सम्मानित किया गया। महाराष्ट्र के गढ़चिरोली ने जल संरक्षण और सूखा प्रबंधन के जरिए कृषि उत्पादन में उल्लेखनीय सुधार का उदाहरण पेश किया। आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू जिले में कम पानी की खपत वाली हाई-वैल्यू बागवानी फसलों को बढ़ावा देकर किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में काम किया गया।

प्राकृतिक खेती के मॉडल ने बांका को दिलाई पहचान

बिहार के बांका जिले में ‘लीलावरण प्राकृतिक खेती भूमि पुनरुद्धार मॉडल’ के जरिए रासायनिक खादों पर निर्भरता कम करने और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की पहल की गई। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़, छत्तीसगढ़ के कोरबा और पंजाब के फाजिल्का जिले के कृषि नवाचारों की भी सम्मेलन में सराहना की गई।

केंद्र और राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद

राष्ट्रीय सम्मेलन में केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर और भागीरथ चौधरी, केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री चंद्रशेखर पेम्मासानी और केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर सहित कृषि, जल शक्ति और ग्रामीण विकास मंत्रालय के प्रतिनिधि मौजूद रहे। प्रशासनिक स्तर पर कृषि सचिव अतीश चंद्रा, पशुपालन एवं डेयरी सचिव नरेश पाल गंगवार, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग सचिव अविनाश जोशी, भूमि संसाधन विभाग के सचिव दिलीप कुमार, ग्रामीण विकास सचिव रोहित कंसल, जल संसाधन सचिव अर्चना वर्मा और आईसीएआर के महानिदेशक एवं डेयर सचिव डॉ. एम. एल. जाट समेत कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

कृषि और ग्रामीण विकास के साझा प्रयासों पर मंथन

सम्मेलन में विभिन्न राज्यों के कृषि उत्पादन आयुक्त, प्रमुख सचिव, 50 से अधिक जिलों के कलेक्टर और केंद्र एवं राज्य सरकारों के वरिष्ठ फील्ड अधिकारियों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन का मुख्य जोर कृषि, जल प्रबंधन, खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी, सहकारिता और ग्रामीण विकास से जुड़ी योजनाओं के बेहतर कन्वर्जेंस के जरिए किसानों की आय बढ़ाने और पिछड़े जिलों को विकास की मुख्यधारा में तेजी से आगे लाने पर रहा।

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