भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को मुलाकात का समय देने से इनकार कर दिया। दोनों नेताओं ने 12 अक्टूबर 2026 को शाम 4 से 5 बजे के बीच मुलाकात का समय मांगा था। उनका उद्देश्य निर्वाचन आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, छात्रों की कथित मनमानी गिरफ्तारी, मेट्रो स्टेशनों को बंद किए जाने और ट्रेनों के रद्द होने जैसे मुद्दों पर ज्ञापन सौंपना था। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश ने अपने जवाब में स्पष्ट किया कि इन विषयों से जुड़े मामले पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं। ऐसे में लंबित मामलों पर अलग से बैठक करना न्यायिक मर्यादा और संवैधानिक सिद्धांतों के अनुरूप नहीं होगा
दरअसल, इस पूरे मामले में न्यायिक प्रोटोकॉल और शक्तियों के पृथक्करण का सिद्धांत महत्वपूर्ण है। भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था में न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधायिका की अपनी-अपनी भूमिकाएं निर्धारित हैं। न्यायपालिका का प्रमुख दायित्व कानून और संविधान के अनुसार मामलों की सुनवाई करना है। यदि किसी राजनीतिक दल के नेता किसी ऐसे मुद्दे पर मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात करते हैं, जो पहले से अदालत में विचाराधीन है, तो इससे न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठ सकते हैं। इसी आधार पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि लंबित मामलों पर बैठक करना शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत के विपरीत होगा और स्थापित न्यायिक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं होगा
मुख्य न्यायाधीश ने अपने पत्र में यह भी स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के पास नेताओं द्वारा उठाए गए सभी प्रशासनिक और कानून-व्यवस्था संबंधी मुद्दों को सीधे प्रशासनिक स्तर पर हल करने की शक्ति नहीं है। हालांकि, संविधान के अनुच्छेद 32 और न्यायिक समीक्षा की शक्तियों के तहत नागरिकों के मौलिक अधिकारों से जुड़े मामलों पर अदालत विचार कर सकती है। इसलिए उन्होंने राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे को ज्ञापन सौंपने के बजाय उचित कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से याचिका दाखिल करने की सलाह दी। उन्होंने यह भी कहा कि कानून के अनुसार ऐसी याचिका पर जल्द सुनवाई की जाएगी
CJI ने अपने पत्र में यह जानकारी भी दी कि इसी तरह के मुद्दों से जुड़े कुछ मामले 13 अक्टूबर को सुनवाई के लिए निर्धारित हैं। उन्होंने नेताओं को सुप्रीम कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से या ई-फाइलिंग के माध्यम से याचिका दाखिल करने का विकल्प दिया। इस घटनाक्रम के बाद मुलाकात से इनकार को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। विपक्ष जहां निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर सवाल उठा रहा है, वहीं इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया के निर्धारित नियम भी चर्चा के केंद्र में हैं। कुल मिलाकर, CJI का संदेश स्पष्ट है कि नागरिकों के अधिकारों से जुड़े मुद्दे अदालत के सामने उठाए जा सकते हैं, लेकिन विचाराधीन मामलों पर चर्चा के लिए निर्धारित न्यायिक प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है।

















