'वंदे मातरम' की रचना के 151 साल पूरे, राष्ट्रपति व ओम बिरला समेत कई नेताओं ने दी शुभकामनाएं


देश 07 November 2026
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'वंदे मातरम' की रचना के 151 साल पूरे, राष्ट्रपति व ओम बिरला समेत कई नेताओं ने दी शुभकामनाएं

नई दिल्ली, 07 नवंबर । राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और केन्द्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह समेत कई नेताओं ने शनिवार को राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' की रचना के 151 वर्ष पूरे होने पर देशवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी।

राष्ट्रपति ने साेशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा, "राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' की रचना के 151 वर्ष पूरे होने पर, मैं सभी देशवासियों को हार्दिक बधाई देती हूं। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान, यह गीत देशभक्तों के लिए साहस, एकता और संकल्प का प्रतीक बना। आज भी, यह हमारी राष्ट्रीय पहचान, आत्म-सम्मान और मातृभूमि के प्रति समर्पण को दर्शाता है। मुझे आशा है कि हमारे देशवासी 'वंदे मातरम' में निहित 'राष्ट्र सर्वोपरि' की भावना को अपनाएंगे और राष्ट्र-निर्माण में अपना योगदान देंगे।"

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि 'वंदे मातरम' भारत माता के प्रति श्रद्धा और देशभक्ति का अमर गीत भारत की राष्ट्रीय चेतना, आत्म-सम्मान और एकता का एक सशक्त प्रतीक है।

केन्द्रीय कपड़ा मंत्री ने कहा कि भारत माता के चरणों में समर्पित यह प्रेरणादायी गीत, हर भारतीय के हृदय में देश के प्रति असीम प्रेम और देशभक्ति का जज्बा जगाता है।

केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ने कहा कि 'वंदे मातरम' भारत की आत्मा की आवाज है। यह सभी को अपनी मातृभूमि से प्रेम करने, उसके प्रति समर्पित होने और उसकी सेवा करने की प्रेरणा देता है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान, इस गीत ने लोगों के दिलों में आज़ादी की भावना जगाई और देश को एकजुट करने में मदद की। भारत माता की आज़ादी के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर देने वाले वीर क्रांतिकारियों को कोटि-कोटि नमन।

उल्लेखनीय है कि 1875 में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित यह कालजयी गीत, स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देश भर के लोगों में राष्ट्र-प्रेम की भावना जगाने वाला बना। विशेष रूप से 1905 के स्वदेशी आंदोलन के समय, 'वंदे मातरम' स्वतंत्रता सेनानियों के लिए प्रेरणा का स्रोत और एक ऐसा उद्घोष बन गया, जिसने विदेशी शासन के विरुद्ध संघर्ष में नई ऊर्जा भर दी।

इस गीत का प्रत्येक शब्द मातृभूमि के प्रति श्रद्धा, त्याग, समर्पण और गौरव को दर्शाता है। इसने अनगिनत क्रांतिकारियों और देशवासियों को राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर देने का साहस दिया।

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