प्रीम कोर्ट ने फैसला दिया है कि कम्पलसरी रिटायरमेंट न तो सज़ा है और न ही किसी कर्मचारी के खिलाफ गलत व्यवहार का आरोप है।
जस्टिस मनमोहन और श्री चंद्रशेखर की बेंच ने छत्तीसगढ़ सरकार के अपने 14 कर्मचारियों में से पांच को ज़बरदस्ती रिटायर करने के फैसले को सही ठहराया। कोर्ट ने कहा कि ऐसे फैसले किसी कर्मचारी के पूरे सर्विस रिकॉर्ड, परफॉर्मेंस और ईमानदारी को देखने के बाद जनता के हित में लिए जाते हैं। कोर्ट ने साफ किया कि कोई कर्मचारी सिर्फ़ इसलिए ज़बरदस्ती रिटायरमेंट को चुनौती नहीं दे सकता क्योंकि उसी तरह के रिकॉर्ड वाले दूसरे कर्मचारी को नौकरी में बने रहने दिया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने आगे साफ़ किया कि कोर्ट का दखल तभी सही है जब रिटायरमेंट ऑर्डर मनमाना हो, बिना किसी सबूत के हो या किसी तरफदारी से प्रभावित हो। बेंच ने यह नतीजा निकाला कि स्क्रीनिंग कमेटी ने एक जैसे क्राइटेरिया को फॉलो किया था, जिसमें पांच कर्मचारियों को लगातार सर्विस के लिए सही नहीं पाया गया, जबकि बाकी नौ ज़रूरी स्टैंडर्ड को पूरा करते थे।















