भारतीय रेलवे में एआई आधारित तकनीकों से सुरक्षा एवं दक्षता होगी और मजबूत


विज्ञान 13 March 2026
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भारतीय रेलवे में एआई आधारित तकनीकों से सुरक्षा एवं दक्षता होगी और मजबूत

भारतीय रेलवे सुरक्षा बढ़ाने और संचालन को अधिक कुशल बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग आधारित कई उन्नत तकनीकों का उपयोग कर रहा है। यह जानकारी रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में दी।

उन्होंने बताया कि रेलवे नेटवर्क में ट्रेनों और ट्रैक की निगरानी के लिए कई स्मार्ट सिस्टम तैनात किए गए हैं।

मशीन विज़न इंस्पेक्शन सिस्टम

मशीन विज़न इंस्पेक्शन सिस्टम (एमवीआईएस) एआई और मशीन लर्निंग आधारित तकनीक है, जो चलती ट्रेन में ढीले, टूटे या लटकते हिस्सों की पहचान कर तुरंत अलर्ट देता है।

  • पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे में 3 सिस्टम

  • डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉर्पोरेशन में 2 सिस्टम

  • दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में 1 सिस्टम

पायलट आधार पर लगाए गए हैं।

व्हील इम्पैक्ट लोड डिटेक्टर

रेलवे ने 24 व्हील इम्पैक्ट लोड डिटेक्टर (WILD) सिस्टम लगाए हैं, जो पहियों के ट्रैक पर पड़ने वाले प्रभाव को मापकर खराब पहियों की पहचान करते हैं।

रोलिंग स्टॉक की ऑनलाइन निगरानी

ऑनलाइन मॉनिटरिंग ऑफ रोलिंग स्टॉक (OMRS) सिस्टम ट्रेनों के पहियों और बेयरिंग की स्थिति की निगरानी करता है। रेलवे नेटवर्क में 25 ऐसे सिस्टम स्थापित किए गए हैं।

ट्रैक निगरानी के लिए एआई

रेलवे ट्रैक की निगरानी के लिए इंटीग्रेटेड ट्रैक मॉनिटरिंग सिस्टम (ITMS) लगाए गए हैं। ये मशीन लर्निंग और इमेज प्रोसेसिंग की मदद से रेल, स्लीपर और फास्टनिंग जैसे ट्रैक घटकों में खराबी का पता लगाते हैं। फिलहाल 3 सिस्टम तैनात हैं।

ड्रोन से निगरानी

ओवरहेड उपकरणों की जांच के लिए रायपुर मंडल में ड्रोन आधारित थर्मल मॉनिटरिंग का परीक्षण किया जा रहा है। भारतीय रेलवे आईआईटी मद्रास के साथ मिलकर एआई आधारित ड्रोन निरीक्षण प्रणाली भी विकसित कर रहा है।

धुंध में लोको पायलट की मदद के लिए तकनीक

ट्राई-नेत्र प्रणाली विकसित की जा रही है, जो धुंध और खराब मौसम में लोको पायलट को बेहतर दृश्य उपलब्ध कराएगी। इसमें ऑप्टिकल कैमरा, इन्फ्रारेड कैमरा और रडार या लाइडार तकनीक का उपयोग होगा।

रेल टेक नीति और पोर्टल

नई रेल टेक नीति के तहत नवाचार और एआई आधारित समाधान विकसित करने के लिए रेल टेक पोर्टल भी शुरू किया गया है। इसके जरिए स्टार्टअप और नवप्रवर्तक रेलवे के साथ मिलकर नई तकनीक विकसित कर सकेंगे।

इस नीति के तहत परियोजनाओं के लिए 50:50 लागत साझेदारी के आधार पर वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी।

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