वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) को भारत की व्यापारिक यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया है और कहा है कि यह दो प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच भविष्योन्मुखी आर्थिक साझेदारी की नींव रखता है। आज नई दिल्ली में मीडिया को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यह समझौता कल से लागू हो जाएगा, जो भारत और ब्रिटेन के बीच द्विपक्षीय व्यापार और निवेश संबंधों के एक नए चरण की शुरुआत का प्रतीक है।
श्री अग्रवाल ने कहा कि यह समझौता भारत के सबसे व्यापक व्यापार समझौतों में से एक है, जो व्यापक क्षेत्रीय कवरेज प्रदान करते हुए शुल्क और गैर-शुल्क बाधाओं को कम करता है। उन्होंने आगे कहा कि यह समझौता डेयरी और कृषि सहित देश के संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा करता है, साथ ही भारतीय वस्तुओं और सेवाओं के लिए बाजार पहुंच का विस्तार करता है। वाणिज्य सचिव ने कहा कि यह समझौता डिजिटल व्यापार, सरकारी खरीद, नवाचार, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), श्रम और पर्यावरण जैसे क्षेत्रों को शामिल करके पारंपरिक व्यापार उदारीकरण से कहीं आगे जाता है। उन्होंने कहा कि इस ढांचे को व्यापार को सुगम बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है, साथ ही यह सुनिश्चित किया गया है कि नियामक उपाय व्यवसायों के लिए अनुचित बाधा न बनें।
दोहरे अंशदान समझौते पर प्रकाश डालते हुए श्री अग्रवाल ने कहा कि इस व्यवस्था से भारतीय पेशेवरों और उनके नियोक्ताओं को लाभ होगा, क्योंकि ब्रिटेन में अस्थायी रूप से काम करने वाले पात्र श्रमिकों को निर्दिष्ट अवधि के लिए वहां सामाजिक सुरक्षा अंशदान का भुगतान करने से छूट मिलेगी। इसके अलावा, यह उन्हें भारत की सामाजिक सुरक्षा प्रणाली में योगदान जारी रखने की भी अनुमति देगा। उन्होंने कहा कि इस समझौते से किसानों, लघु एवं मध्यम उद्यमों, समुद्री खाद्य निर्यातकों और श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए नए अवसर सृजित होने की उम्मीद है। श्री अग्रवाल ने आगे कहा कि सरकार का ध्यान अब यह सुनिश्चित करने पर होगा कि भारतीय निर्यातक भारत-ब्रिटेन सीईटीए के त














