विधायक जितना अध्ययन करेंगे, उतना प्रभावी ढंग से जनता की आवाज उठा सकेंगेः ओम बिरला


देश 15 July 2026
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विधायक जितना अध्ययन करेंगे, उतना प्रभावी ढंग से जनता की आवाज उठा सकेंगेः ओम बिरला

जयपुर, 15 जुलाई । लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा है कि विधानसभा पूरे प्रदेश की कठिनाइयां जानने का प्रत्यक्ष और सबसे सशक्त माध्यम है। यहां से आम जनजीवन की समस्याओं के बारे में जानकर हम समाधान की राह प्रशस्त कर सकते हैं।

बिरला बुधवार काे राजस्थान विधानसभा के 75 वर्ष पूरे होने पर आयोजित अमृत महोत्सव के उद्घाटन समारोह काे संबाेधित कर रहे थे। उन्होंने युवा विधायकाें से आह्वान करते हुए कहा कि सदन के वेल में आकर हंगामा करने से कोई बड़ा नेता नहीं बनता, सदन में दिए गए सार्थक भाषण और तर्कपूर्ण बहस ही जनप्रतिनिधि की वास्तविक पहचान बनते हैं। राजस्थान विधानसभा लोकतांत्रिक संस्कारों, संवाद और सहमति की सबसे बड़ी पाठशाला रही है। विधायक जितना अधिक अध्ययन करेंगे, सुनेंगे और विषयों की गहराई समझेंगे, उतना ही प्रभावी ढंग से जनता की आवाज सदन में उठा सकेंगे। सदन में दिए गए भाषण वर्षों तक पढ़े और याद किए जाते हैं इसलिए जनप्रतिनिधियों को मर्यादित और तथ्यपरक बहस की परंपरा को आगे बढ़ाना चाहिए।

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि सरकार की सकारात्मक आलोचना लोकतंत्र को मजबूत करती है और विधानसभा जनता की समस्याओं को उठाने का सबसे प्रभावी मंच है। सवाल जितने सार्थक होंगे, शासन उतना ही जवाबदेह बनेगा। उन्होंने विधानसभा को अपनी पहली पाठशाला बताते हुए कहा कि यहीं से उन्हें लोकतांत्रिक संस्कार और संसदीय मर्यादाओं का ज्ञान मिला। उन्होंने अध्यक्ष पद की गरिमा बनाए रखने पर भी जोर देते हुए कहा कि हर परिस्थिति में संयम, सहजता और निष्पक्षता बनाए रखना पीठासीन अधिकारी की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।

बिरला ने युवा सदस्यों से कहा कि वरिष्ठ विधायकों से सीखने की प्रवृत्ति बनाएं रखें। सदन में अधिक से अधिक समय तक रुकें, अपनी बात कहने के बाद और पहले अन्य सदस्यों को भी सुनें।

राजस्थान की महान विधायिका ने देश को बड़े नेता दिए हैं, राष्ट्र की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पूर्ण विश्वास है कि आगे भी इस सदन की परंपराएं, यहाँ की विधायी रीति-नीति राष्ट्र की प्रतिष्ठा और लोकतंत्र को सशक्त बनाने में अग्रणी रहेंगे।

बिरला ने कहा कि राजस्थान वीरों की भूमि होने के साथ लोकतांत्रिक मूल्यों की महान धरा भी है। राजस्थान की लोकतांत्रिक चेतना केवल पचहत्तर वर्षों की नहीं बल्कि हजारों वर्षों की विरासत है। पिछले साढ़े सात दशकों में इस सदन ने अनेक ऐतिहासिक विधेयकों, दूरदर्शी बहसों और जनोन्मुख निर्णयों के माध्यम से लोकतंत्र को सशक्त बनाया है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि सदन का समय जनता के हित में उपयोग होना चाहिए और विधायकों को अधिक समय देकर जनता की समस्याओं के समाधान पर ध्यान देना चाहिए। लोकतंत्र में सरकारें बदलती हैं लेकिन जनसेवा का संकल्प कभी नहीं बदलता। संविधान, सुशासन, जनकल्याण और विकास सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताएं हैं।

उन्हाेंने कहा कि राजस्थान विधानसभा का गौरवशाली इतिहास हम सभी के लिए गर्व का विषय है। 1952 से अब तक पूर्व और वर्तमान सभी जनप्रतिनिधियों ने राज्य के विकास की मजबूत नींव रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। लोकतंत्र हमारी अटूट आस्था और जनतंत्र की आकांक्षाओं का उत्सव है। राजस्थान की 8 करोड़ जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरना हर जनप्रतिनिधि का दायित्व है। उन्होंने सत्ता और विपक्ष से जनहित के मुद्दों पर मिलकर काम करने की अपील करते हुए कहा कि मतभेद हो सकते हैं लेकिन जनहित हमेशा सर्वोपरि होना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने नई पीढ़ी को संसदीय परंपराओं और लोकतांत्रिक मूल्यों से जोड़ने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि पूर्व जनप्रतिनिधियों का अनुभव आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायक है। साथ ही जनता का विश्वास बनाए रखना हर जनप्रतिनिधि की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।

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