छत्तीसगढ़ में बढ़ते सड़क हादसों और मौतों को लेकर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने बुधवार को राज्य सरकार, पुलिस और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए 10 दिनों के भीतर राज्य सरकार, पुलिस प्रशासन और एनएचएआई को 10 दिनों के भीतर शपथ पत्र के साथ अपनी विस्तृत कार्ययोजना पेश करने का निर्देश दिया है। शपथ पत्र के साथ विस्तृत कार्ययोजना भी मांगी है।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायाधीश रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने राज्य में एक साल के भीतर 6 हजार 967 लोगों की सड़क दुर्घटनाओं में हुई मौत पर गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि सड़क सुरक्षा को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उच्च न्यायालय में कोर्ट कमिश्नर एडवोकेट रवींद्र शर्मा और अपूर्व त्रिपाठी द्वारा पूरे प्रदेश से जुटाए गए अधिकृत आंकड़े पेश किए गए। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में प्रदेश में 15,484 सड़क हादसों में 6,967 लोगों की मौत हुई। वर्ष 2026 में 31 मई तक (शुरुआती 5 महीनों में) 6,891 हादसों में 3,170 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।
नियमों के अनुसार हर जिले में कलेक्टर की अध्यक्षता में हर महीने सड़क सुरक्षा समिति की बैठक होना अनिवार्य है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। कोर्ट कमिश्नर ने बेंच को बताया कि सरगुजा जिले में साल 2025 के दौरान सड़क हादसों में 300 से अधिक मौतें हुईं, फिर भी पूरे साल में महज एक बैठक आयोजित की गई। कांकेर जिले का हाल भी ऐसा ही रहा, जहां सालभर में सिर्फ एक बार समिति की औपचारिक बैठक बुलाई गई।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने हाईवे पर बैठे आवारा मवेशियों और खड़ी भारी गाड़ियों को लेकर पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर कड़े सवाल खड़े किए। उन्होंने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि राजधानी रायपुर और आसपास के इलाकों में यातायात व्यवस्था पूरी तरह भगवान भरोसे चल रही है। अदालत ने पाया कि औद्योगिक क्षेत्रों और राष्ट्रीय राजमार्गों पर 10 टन की क्षमता वाले वाहनों में 22 से 25 टन तक माल लादा जा रहा है और वजन जांचने वाली वेइंग मशीनें लंबे समय से बंद पड़ी हैं। इसके अलावा सड़कों पर ट्रकों की अवैध पार्किंग भी लगातार जानलेवा हादसों को न्योता दे रही है।
अदालत में प्रस्तुत प्रदेश के 10 सबसे खतरनाक ‘ब्लैक स्पॉट्स’ (अत्यधिक दुर्घटना संभावित क्षेत्र) की सूची ने राजधानी रायपुर की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कुल 10 में से 7 ब्लैक स्पॉट्स अकेले रायपुर जिले में चिन्हित किए गए हैं।
बढ़ते सड़क हादसों पर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट सख्त, सरकार-एनएचएआई से 10 दिन में कार्ययोजना मांगी
















