सक्ती: 'बाल संजीवनी अभियान' से बच्चों को मुफ्त शिक्षा और महिलाओं को रोजगार

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सक्ती: 'बाल संजीवनी अभियान' से बच्चों को मुफ्त शिक्षा और महिलाओं को रोजगार

ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा का विस्तार और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से स्वामिनी वंदनीय महिला सहयोग फाउंडेशन द्वारा संचालित "बाल संजीवनी अभियान" सामाजिक परिवर्तन की एक प्रेरणादायक पहल बनकर उभर रहा है। इस अभियान के तहत आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यम वर्गीय परिवारों के बच्चों को निःशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। साथ ही शिक्षित एवं बेरोजगार महिलाओं को शिक्षिका के रूप में सम्मानजनक रोजगार देकर महिला सशक्तिकरण को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

फाउंडेशन का मानना है कि, किसी भी राष्ट्र की मजबूत नींव शिक्षित बच्चों और आत्मनिर्भर महिलाओं पर टिकी होती है। इसी सोच के साथ संस्था ग्रामीण क्षेत्रों के उन बच्चों तक शिक्षा पहुंचाने का कार्य कर रही है, जो आर्थिक या सामाजिक कारणों से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित रह जाते हैं।

अभियान की शुरुआत सक्ती जिले से की गई है। इस परियोजना में आशा चंद्रा, रेवती चंद्रा, तुलसी यादव, मंजू गबेल और राजकुमारी शिक्षिका के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं। इनके मार्गदर्शन में बच्चों को नियमित पढ़ाई के साथ नैतिक शिक्षा, अनुशासन, व्यक्तित्व विकास और सामाजिक जिम्मेदारियों की जानकारी भी दी जा रही है।

बदलते डिजिटल दौर को देखते हुए फाउंडेशन बच्चों को मोबाइल फोन के अत्यधिक उपयोग से होने वाले दुष्प्रभावों के प्रति भी जागरूक कर रहा है। इसके अलावा साइबर अपराध, सोशल मीडिया का सुरक्षित उपयोग, ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाव, इंटरनेट सुरक्षा और डिजिटल शिष्टाचार जैसे विषयों पर भी बच्चों को जानकारी दी जा रही है, ताकि वे तकनीक का सुरक्षित और सकारात्मक उपयोग कर सकें।

संस्था का उद्देश्य केवल बच्चों को शिक्षा देना ही नहीं, बल्कि स्कूल छोड़ चुके बच्चों को दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना, ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना और प्रत्येक परिवार तक शिक्षा का महत्व पहुंचाना भी है। फाउंडेशन भविष्य में इस अभियान का विस्तार प्रदेश के अन्य जिलों और ग्रामीण इलाकों तक करने की तैयारी कर रहा है।

स्वामिनी वंदनीय महिला सहयोग फाउंडेशन लंबे समय से शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, बाल विकास, सामाजिक जागरूकता और जनसेवा के क्षेत्र में कार्य कर रहा है। संस्था का कहना है कि जब एक महिला आत्मनिर्भर बनती है तो उसका पूरा परिवार सशक्त होता है और जब प्रत्येक बच्चा शिक्षित होगा तभी समाज और राष्ट्र का समग्र विकास संभव होगा।

ग्रामीण शिक्षा, महिला रोजगार और सामाजिक जागरूकता को एक साथ जोड़ने वाला 'बाल संजीवनी अभियान' स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों के बीच भी सराहना प्राप्त कर रहा है। संस्था ने "हर बच्चे को शिक्षा – हर महिला को सम्मानजनक रोजगार" के संकल्प के साथ इस जनहितकारी अभियान को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई है।

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