नेपाल में पौराणिक महत्व की बरुण नदी में जलविद्युत परियोजना का विरोध


विदेश 26 August 2026
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नेपाल में पौराणिक महत्व की बरुण नदी में जलविद्युत परियोजना का विरोध

काठमांडू, 26 अगस्त।


नेपाल में पौराणिक महत्व की बरुण नदी में जलविद्युत परियोजना का विरोध शुरू हो गया है। जिला समन्वय समिति खांदवारी और संखुवासभा ने प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद कार्यालय को लिखे पत्र में धार्मिक और पौराणिक महत्व की बरुण नदी में जलविद्युत परियोजना का निर्माण ना कराने का आग्रह किया है। यह परियोजना संखुवासभा जिले के भोटखोला गाउंपालिका के स्याक्सिला स्थित मकालू-बरुण राष्ट्रीय निकुंज तथा संरक्षण क्षेत्र में बरुण नदी पर प्रस्तावित है।

समिति ने 132 मेगावाट क्षमता वाली लोअर बरुण खोला जलविद्युत परियोजना के निर्माण की अनुमति नहीं देने का आग्रह किया है। जिला समन्वय समिति के प्रमुख सुमन शाक्य ने कहा कि बरुण नदी धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र है। इसका संरक्षण आवश्यक है।

समिति के अनुसार, भोटखोला गाउंपालिका की 13वीं कार्यपालिका बैठक ने भी वार्ड नंबर 4 में आने वाली बरुण नदी को धार्मिक विरासत के रूप में संरक्षित करने तथा मकालू-बरुण राष्ट्रीय निकुंज एवं संरक्षण क्षेत्र के भीतर जलविद्युत निर्माण रोकने का निर्णय लिया था। जिला समन्वय समिति ने गाउंपालिका के इस निर्णय का समर्थन करते हुए संबंधित निकायों का ध्यान आकर्षित कराया है।

समिति के अनुसार, संखुवासभा में अरुण नदी को छोड़कर विभिन्न नदियों से करीब 6,000 मेगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता है। वर्तमान में राष्ट्रीय प्रसारण लाइन में करीब 75 मेगावाट बिजली जुड़ी हुई है, जबकि अरुण नदी से करीब 3,576 मेगावाट बिजली उत्पादन की प्रक्रिया चल रही है।

बरुण नदी में परियोजना का निर्माण होने से धार्मिक आस्था, पर्यावरण और पूरे क्षेत्र पर असर पड़ने की आशंका जताते हुए समिति ने राष्ट्रीय निकुंज तथा वन्यजीव संरक्षण अधिनियम सहित कानूनी प्रावधानों और संरक्षित क्षेत्र संबंधी नीतियों के अनुसार परियोजना की अनुमति नहीं देने का आग्रह किया है। संरक्षित क्षेत्र के भीतर भौतिक बुनियादी ढांचे के निर्माण संबंधी कार्यनीति के प्रावधानों को लागू करने का अनुरोध भी संबंधित निकायों से किया गया है।

बरुण नदी को हिंदू और बौद्ध धर्मावलंबी धार्मिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, नदी से कई पौराणिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। बरुण नदी के किनारे हर वर्ष माघ महीने की पहली तारीख को लगने वाला मकर मेला भोट क्षेत्र और निचले इलाकों के निवासियों के बीच मुलाकात का महत्वपूर्ण अवसर भी प्रदान करता है।

स्थानीय लोग लंबे समय से मांग करते रहे हैं कि धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखने वाली बरुण नदी में जलविद्युत परियोजना का निर्माण नहीं किया जाए, क्योंकि इससे नदी के प्राकृतिक स्वरूप और धार्मिक अस्तित्व पर असर पड़ सकता है। इससे पहले भी स्थानीय लोगों ने इस नदी पर जलविद्युत परियोजनाओं को रोकने की मांग की थी।

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