चार साल में लगभग 70,000 डिज़ाइन इंजीनियरों को प्रशिक्षण, अब सिस्टम डिज़ाइन और सटीक विनिर्माण के विस्तार पर ध्यान : अश्विनी वैष्णव


देश 19 September 2026
post

चार साल में लगभग 70,000 डिज़ाइन इंजीनियरों को प्रशिक्षण, अब सिस्टम डिज़ाइन और सटीक विनिर्माण के विस्तार पर ध्यान : अश्विनी वैष्णव

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सेमीकॉन इंडिया 2026 के दौरान एक चर्चा में सेमीकंडक्टर स्किलिंग पर कहा कि भारत ने शुरू में 85,000 डिज़ाइन इंजीनियरों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा था और चार साल के अंदर ही लगभग 70,000 डिज़ाइन इंजीनियरों को प्रशिक्षण दिया गया है। उन्होंने कहा कि छोटे शहरों के संस्थानों समेत लगभग 400 इंजीनियरिंग कॉलेजों के छात्रों को इंडस्ट्री-ग्रेड ईडीए टूल्स मिल रहे हैं। छात्रों को अपने डिज़ाइन को टेप-आउट तक ले जाने और अपने आइडिया को उत्पाद के रूप में विकसित होते देखने के मौके भी मिल रहे हैं।

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि आईएसएम 2.0 के तहत, स्किलिंग पर फोकस चिप डिज़ाइन से आगे बढ़कर सिस्टम डिज़ाइन की ओर जाएगा, जिसका मकसद ऐसी प्रतिभा तैयार करना है, जिसकी इंडस्ट्री में बहुत ज़्यादा मांग हो। उन्होंने यह भी कहा कि क्लीनरूम टेक्नीशियन और मेंटेनेंस कर्मचारियों की मांग बढ़ रही है और उद्योग जगत की मांग को देखते हुए आईएसएम 2.0 के तहत एक लाख टेक्नीशियनों को प्रशिक्षण देने के लक्ष्य को बढ़ाने की ज़रूरत पड़ सकती है।

कल शुक्रवार को सेमीकॉन इंडिया 2026 के दौरान एक चर्चा में वैष्णव ने कहा कि भारत का सेमीकंडक्टर मिशन अब बुनियादी ढांचा तैयार करने के चरण से आगे बढ़कर बड़े पैमाने पर उद्योग बनाने की ओर बढ़ गया है। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) 2.0 के तहत अगला चरण एक पूरा सेमीकंडक्टर परिस्थितिकी तंत्र विकसित करने पर केंद्रित होगा। सेमीकॉन इंडिया 2026 के दौरान एक चर्चा में श्री वैष्णव ने कहा कि आईएसएम 1.0 का फोकस बुनियादी इकोसिस्टम बनाने पर था, जबकि आईएसएम2.0 सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री को छह मुख्य स्तंभों – डिज़ाइन, मटीरियल और मशीनें, और अधिक फैब्स, और अधिक एटीएमपी यूनिट्स, अनुसंधान एवं विकास और प्रतिभा के आधार पर आगे बढ़ाएगा।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आईएसएम 1.0, जिसे मूल रूप से छह साल के प्रोग्राम के तौर पर शुरू किया गया था, उसने अपने लक्ष्य सिर्फ चार साल में ही हासिल कर लिए। उन्होंने भरोसा जताया कि निवेशकों की मज़बूत और बढ़ती दिलचस्पी के साथ आईएसएम 2.0 भी तय समय से पहले आगे बढ़ेगा।

उन्होंने बताया कि भारत में चिप बनाने वाले पांच प्लांट में व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो गया है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह भारतीय सेमीकंडक्टर विनिर्माण की लागत और गुणवत्ता के मामले में मुकाबला करने की क्षमता को दिखाता है, जो वैश्विक बाज़ार में प्रतिस्पर्धा के लिए ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि अभी सेमीकंडक्टर उत्पादों की मांग ज़्यादा है और कई कंपनियाँ तेज़ी से उत्पादन बढ़ा रही हैं। उन्होंने यह भी बताया कि 2028 में शुरू होने वाले एक फैब की क्षमता का एक बड़ा हिस्सा पहले ही बुक हो चुका है।

केंद्रीय मंत्री वैष्णव ने कहा कि सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स वैश्विक उद्योग हैं, जिनमें कंपोनेंट्स और उत्पाद वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के हिस्से के तौर पर अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पार आते-जाते रहते हैं।

वहीं, डिज़ाइन को भारत की बड़ी ताकतों में से एक बताते हुए, वैष्णव ने कहा कि देश की डिज़ाइन क्षमता, जो आईटी इंडस्ट्री और वैश्विक क्षमता केंद्रों पर आधारित है, अब सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भी फैल रही है। उन्होंने कहा कि अनुमान के मुताबिक आईएसएम 2.0 के तहत कम से कम 200 चिप डिज़ाइन कंपनियाँ सामने आएँगी और उन्होंने इसे घरेलू सेमीकंडक्टर आईपी बनाने के लिए “गेम चेंजर” बताया।

You might also like!