मनोज तिवारी के अकेलेपन को देख बेटी रीति ने कराई थी दूसरी शादी, अब सौतेली बहनों की बनीं 'मदर फिगर'


मनोरंजन 14 October 2026
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मनोज तिवारी के अकेलेपन को देख बेटी रीति ने कराई थी दूसरी शादी, अब सौतेली बहनों की बनीं 'मदर फिगर'

मनोज तिवारी के जीवन में परिवार और रिश्तों की कहानी हमेशा चर्चा का विषय रही है। भोजपुरी सिनेमा के लोकप्रिय अभिनेता और राजनेता मनोज तिवारी ने अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर मनोरंजन जगत से लेकर राजनीति तक अपनी अलग पहचान बनाई है। हालांकि, उनकी निजी जिंदगी में भी कई ऐसे मोड़ आए, जिन्होंने उनके परिवार को एक नई दिशा दी। मनोज तिवारी की बेटी रीति तिवारी ने अपने पिता के जीवन में दोबारा खुशियां लाने में अहम भूमिका निभाई। बताया जाता है कि पिता को अकेले देखकर रीति चाहती थीं कि उनकी जिंदगी में फिर से एक साथी आए, जो उनका साथ दे सके और परिवार में खुशियां वापस ला सके। इसी भावना के साथ उन्होंने अपने पिता की दूसरी शादी के फैसले का समर्थन किया। मनोज तिवारी ने पहली पत्नी रानी तिवारी से अलग होने के बाद साल 2020 में सुरभि तिवारी से दूसरी शादी की थी। इस शादी के बाद उनके परिवार में नई शुरुआत हुई और उनकी जिंदगी में खुशियों के नए रंग जुड़े। सुरभि से मनोज तिवारी की दो बेटियां हुईं, जिनके नाम सान्विका और लावण्या हैं। इस तरह रीति को दो छोटी बहनें मिलीं, जिनके साथ उनका रिश्ता समय के साथ और गहरा होता गया। रीति ने केवल बड़ी बहन की भूमिका ही नहीं निभाई, बल्कि अपनी छोटी बहनों के प्रति स्नेह और जिम्मेदारी दिखाते हुए उनके जीवन में एक मार्गदर्शक की तरह जगह बनाई। यही वजह है कि उन्हें अपनी सौतेली बहनों के लिए 'मदर फिगर' के रूप में भी देखा जाता है। परिवार में उम्र का अंतर और अलग-अलग परिस्थितियां होने के बावजूद रिश्तों में प्यार और अपनापन बनाए रखना आसान नहीं होता, लेकिन रीति ने इस रिश्ते को सहजता से निभाने की कोशिश की। मनोज तिवारी के लिए भी अपनी बेटियों को एक-दूसरे के करीब देखना निश्चित रूप से खुशी का विषय है। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि परिवार केवल खून के रिश्तों से नहीं, बल्कि प्यार, सम्मान, समझ और एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारी से भी बनता है। रीति तिवारी का अपनी छोटी बहनों के प्रति स्नेह इस बात की मिसाल है कि रिश्तों को मजबूत बनाने के लिए दिल में अपनापन होना सबसे जरूरी है। आज मनोज तिवारी के परिवार की यह कहानी लोगों का ध्यान खींचती है और बताती है कि कभी-कभी बच्चों का सहयोग भी माता-पिता की जिंदगी में नई शुरुआत का कारण बन सकता है।

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