मुंबई, । भारतीय संविधान के शिल्पकार डॉ. भीमराव आंबेडकर के जीवन की कहानी अब एक नए अंदाज में पर्दे पर उतरने जा रही है। माइक्रोड्रामा मंच कुकू टीवी ने उनके जीवन पर आधारित ऐतिहासिक सीरीज 'बाबासाहेब' पेश की है।
यह माइक्रोड्रामा डॉ. आंबेडकर के जीवन के उस दौर पर केंद्रित है, जब बालक भीमराव जातिगत भेदभाव, सामाजिक असमानता और आर्थिक कठिनाइयों के बीच शिक्षा हासिल करने के लिए संघर्ष कर रहे थे। राष्ट्रीय नेता और संविधान निर्माता के रूप में पहचान बनाने से पहले उनके जीवन में आए अनुभवों को इसमें प्रमुखता दी गई है। डॉ. आंबेडकर की आत्मकथात्मक रचना 'वेटिंग फॉर ए वीजा' से प्रेरित यह सीरीज ऐतिहासिक घटनाओं को आधार बनाकर उनके संघर्ष और विचारों के विकास को सामने लाने का प्रयास करती है।
'बाबासाहेब' में शिक्षा को बदलाव की सबसे बड़ी ताकत के रूप में दिखाया गया है। सामाजिक बंधनों और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद भीमराव की ज्ञान हासिल करने की जिद उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। वर्ष 1913 में उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका जाने का उनका सफर इस कहानी का अहम पड़ाव है। सीरीज में उनके जीवन के अलग-अलग चरणों को पांच कलाकारों ने निभाया है। राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्मकार जयंत सोमलकर भी इस प्रस्तुति का हिस्सा हैं। फिल्म 'कोर्ट' से पहचान बनाने वाले शिरीष पवार ने रामजी सकपाल, जबकि राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की पूर्व छात्रा स्नेहलता तागड़े ने जीजाबाई सकपाल की भूमिका निभाई है। अनुभवी अभिनेता राजेश भोसले शिक्षाविद् कृष्णाजी केशव केलुस्कर के किरदार में नजर आते हैं। सीरीज के रचनात्मक निर्माता सच्चित पुराणिक भी इसमें अतिथि भूमिका निभा रहे हैं। कलाकारों ने कबीर के दोहों और एक लोकगीत को अपनी आवाज भी दी है।
इस माइक्रोड्रामा की खासियत इसका आधुनिक प्रस्तुति अंदाज है। इसमें वास्तविक कलाकारों के अभिनय के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से तैयार किए गए परिवेश और दृश्य शामिल किए गए हैं, ताकि उस दौर की परिस्थितियों को पर्दे पर जीवंत किया जा सके। तकनीक के इस्तेमाल के बावजूद कहानी के केंद्र में मानवीय संघर्ष और कलाकारों का अभिनय रखा गया है।

















