रायगढ़। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के निर्देशन एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल सोनी के मार्गदर्शन में जूटमिल पुलिस ने पेट्रोल पंप पर फर्जी ऑनलाइन भुगतान का स्क्रीनशॉट दिखाकर पेट्रोल भरवाने और बिना भुगतान किए फरार होने वाले युवक को गिरफ्तार कर धोखाधड़ी के अपराध में न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है।
मामले में 31 जुलाई 2026 को दर्रामुड़ा स्थित भारत पेट्रोलियम पेट्रोल पंप के संचालक अमित कुमार गुप्ता ने थाना जूटमिल में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि पिछले लगभग दो माह के दौरान एक अज्ञात युवक मारुति सुजुकी बलेनो कार से दो बार पेट्रोल पंप पहुंचा। पहली बार 7 जून 2026 की रात करीब 10:24 बजे ₹2,500 तथा दूसरी बार 25 जुलाई 2026 की रात 12:09 बजे ₹3,600 का पेट्रोल भरवाकर उसने क्यूआर कोड से भुगतान करने की बात कही और मोबाइल में फर्जी भुगतान का स्क्रीनशॉट दिखाकर कर्मचारियों को झांसा देते हुए तेज गति से वाहन लेकर फरार हो गया। दोनों घटनाओं में पेट्रोल पंप को कुल ₹6,100 की आर्थिक क्षति हुई।
रिपोर्ट पर थाना जूटमिल में अपराध क्रमांक 429/2026 धारा 318(2) बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर विवेचना प्रारंभ की गई। जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल एवं मार्ग में लगे सीसीटीवी कैमरों तथा झलमला टोल प्लाजा सहित अन्य स्थानों के फुटेज का बारीकी से परीक्षण किया। शिकायतकर्ता एवं कर्मचारियों ने वाहन की विशेष पहचान बताते हुए जानकारी दी कि बलेनो कार की आगे-पीछे की नंबर प्लेट काली पट्टी से ढकी हुई थी, बाएं ओर काले रंग का मिरर कवर, दाहिनी ओर सफेद-काले रंग का मिरर कवर तथा डिक्की के पास क्षतिग्रस्त प्लास्टिक की मरम्मत का निशान था। इन विशिष्ट चिन्हों के आधार पर पुलिस ने संदिग्ध वाहन सीजी-13-एक्यू-2394 को चिन्हित किया।
पेट्रोल पंप कर्मचारियों से वाहन की शिनाख्त कराने पर पुष्टि हुई कि यही वाहन घटना में प्रयुक्त हुआ था। इसके बाद चालक मयंक शर्मा एवं वाहन स्वामी उसके पिता से पूछताछ की गई। पूछताछ में चालक *मयंक शर्मा (19 वर्ष) निवासी वार्ड क्रमांक-02, बावलीकुआं, श्रमिक स्कूल के पीछे, थाना कोतवाली रायगढ़* ने दोनों घटनाओं को अंजाम देना स्वीकार किया। आरोपी के मेमोरेंडम कथन के आधार पर घटना में प्रयुक्त सफेद रंग की मारुति सुजुकी बलेनो कार एवं उसके दस्तावेज जब्त किए गए। विवेचना में आरोपी द्वारा छलपूर्वक बेईमानी करने का अपराध पाए जाने पर प्रकरण में धारा 318(4) बीएनएस भी जोड़ी गई।
आरोपी मयंक शर्मा को 6 अगस्त 2026 को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया। जूटमिल पुलिस की तकनीकी जांच, सीसीटीवी विश्लेषण और सूक्ष्म विवेचना से इस धोखाधड़ी के मामले का सफलतापूर्वक खुलासा किया गया।








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