2030 तक भारत-रूस के बीच 100 बिलियन डॉलर का व्यापार लक्ष्य, पीयूष गोयल ने आर्थिक साझेदारी तेज करने का किया आह्वान


विदेश 11 September 2026
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2030 तक भारत-रूस के बीच 100 बिलियन डॉलर का व्यापार लक्ष्य, पीयूष गोयल ने आर्थिक साझेदारी तेज करने का किया आह्वान

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को भारत और रूस के बीच आर्थिक एवं औद्योगिक साझेदारी को तेजी से आगे बढ़ाने का आह्वान किया। नई दिल्ली में ‘इनोप्रोम इंडिया 2026’ के दौरान रूस के उद्योग एवं व्यापार मंत्री एंटोन अलीखानोव के साथ पूर्ण बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने दोनों देशों के उद्योग जगत से 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 बिलियन डॉलर और दोतरफा निवेश को 50 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य पर मिलकर काम करने का आग्रह किया।

मौजूदा व्यापार को 60 से 100 बिलियन डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य

पीयूष गोयल ने कहा कि वर्तमान में करीब 60 बिलियन डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार को अगले चार वर्षों में 100 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने के लिए लगभग 40 बिलियन डॉलर की अतिरिक्त वृद्धि जरूरी होगी। इसके लिए हर वर्ष लगातार दोहरे अंकों की वृद्धि हासिल करनी होगी। उन्होंने कहा कि यह लक्ष्य केवल सरकारों के प्रयासों से नहीं, बल्कि दोनों देशों के उद्योग जगत की सक्रिय भागीदारी से हासिल किया जा सकता है।

फार्मा, ऑटो कंपोनेंट्स और खाद्य क्षेत्र में बड़े अवसर

दोनों देशों के बीच व्यापार में विविधता लाने पर जोर देते हुए गोयल ने कहा कि फार्मास्यूटिकल्स, ऑटो कंपोनेंट्स, ट्रैक्टर और खाद्य उत्पादों जैसे क्षेत्रों में निर्यात बढ़ाने की काफी संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि कई ऐसे उत्पाद हैं, जिन्हें रूस वैश्विक स्तर पर बड़े पैमाने पर आयात करता है और भारत बड़े पैमाने पर निर्यात करता है, लेकिन इन उत्पादों का रूस को भारतीय निर्यात अभी अपेक्षाकृत कम है।

खाद्य उत्पादों के निर्यात में हुई बढ़ोतरी

गोयल ने बताया कि रूस को मांस और मांस से बने खाद्य उत्पादों का भारतीय निर्यात 36 मिलियन डॉलर से बढ़कर 97 मिलियन डॉलर हो गया है। मछली और जलीय उत्पादों का निर्यात 123 मिलियन डॉलर से बढ़कर 159 मिलियन डॉलर, जबकि खाद्य सब्जियों का निर्यात 38 मिलियन डॉलर से बढ़कर 54 मिलियन डॉलर हो गया है। कॉफी, चाय और मसालों का निर्यात 13% बढ़कर 116 मिलियन डॉलर हो गया, जबकि मिलिंग उद्योग के उत्पादों का निर्यात करीब दोगुना हुआ है।

गैर-ऊर्जा व्यापार बढ़ाने पर जोर

वाणिज्य मंत्री ने कहा कि दोनों देशों के बीच गैर-ऊर्जा व्यापार अभी अपनी क्षमता से काफी कम है। फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग सामान, केमिकल्स, टेक्सटाइल्स, खाद्य उत्पादों, समुद्री उत्पादों और ऑटो उत्पादों के भारतीय निर्यात को बढ़ाना व्यापार में संतुलन लाने के लिए महत्वपूर्ण होगा।

50 बिलियन डॉलर के निवेश लक्ष्य पर भी जोर

निवेश के मोर्चे पर गोयल ने कहा कि भारत-रूस प्राथमिकता निवेश परियोजना तंत्र उन्नत विनिर्माण, ऊर्जा, खनन, रेलवे और उभरती प्रौद्योगिकियों में 40 सक्रिय निवेश परियोजनाओं पर नजर रख रहा है। उन्होंने रूस से फार्मास्यूटिकल्स, आईटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेवाओं, इंजीनियरिंग और रेलवे जैसे क्षेत्रों में भारत के लिए और अधिक निवेश अवसर उपलब्ध कराने का आग्रह किया।

नई द्विपक्षीय निवेश संधि पर तेजी से काम

गोयल ने कहा कि भारत और रूस नई द्विपक्षीय निवेश संधि पर तेजी से काम कर रहे हैं। इसका उद्देश्य दोनों देशों के निवेशकों को निवेश से जुड़े फैसले लेते समय जरूरी कानूनी भरोसा उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि भारत और यूरेशियन आर्थिक संघ के बीच मुक्त व्यापार वार्ता भी जारी है, जिससे उद्योगों और खासकर एमएसएमई के लिए नए बाजार खुलेंगे।

स्थानीय मुद्राओं में भुगतान व्यवस्था मजबूत करने पर जोर

मंत्री ने कहा कि दोनों देश राष्ट्रीय और स्थानीय मुद्राओं में भुगतान की व्यवस्था को मजबूत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर व्यापार कई बार टैरिफ की तुलना में भुगतान संबंधी अड़चनों के कारण अधिक प्रभावित होता है। गोयल ने अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे और चेन्नई-व्लादिवोस्तोक समुद्री गलियारे जैसी कनेक्टिविटी परियोजनाओं में निवेश बढ़ाने पर भी जोर दिया।

रूसी कंपनियों को भारत में विनिर्माण का न्योता

पीयूष गोयल ने रूसी उद्योग से भारत में केवल सामान बेचने के बजाय देश में विनिर्माण करने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा कि भारत के राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारे निवेश के लिए तैयार हैं और वैश्विक साझेदारों के लिए प्लग-एंड-प्ले बुनियादी ढांचा उपलब्ध है। उन्होंने रूसी कंपनियों के लिए भारत की युवा प्रतिभा और कुशल श्रमबल को महत्वपूर्ण संसाधन बताया।

भारतीय उद्योग से रूस में निवेश बढ़ाने की अपील

गोयल ने भारतीय उद्योग से रूस को केवल व्यापारिक यात्रा के गंतव्य के तौर पर नहीं, बल्कि निवेश और निर्यात के अवसर के रूप में देखने का आग्रह किया। उन्होंने कारोबारियों से नई साझेदारियां और व्यावसायिक संभावनाएं तलाशने को कहा।

कारोबार और निवेश की बाधाएं दूर करने का आह्वान

मंत्री ने दोनों देशों के अधिकारियों से व्यापार और निवेश में आने वाली व्यावहारिक बाधाओं की पहचान कर उन्हें दूर करने का आग्रह किया। उन्होंने भुगतान प्रणाली, प्रमाणन, मानकों, लॉजिस्टिक्स, वीजा और मंजूरी जैसी प्रक्रियाओं में आने वाली दिक्कतों को दूर करने पर जोर दिया।

भारत के औद्योगिक इकोसिस्टम की गिनाईं खूबियां

गोयल ने कहा कि मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, औद्योगिक पार्क योजना और स्टार्टअप इंडिया जैसी पहलों के जरिए भारत ने बड़े पैमाने पर विनिर्माण और औद्योगिक विस्तार के लिए मजबूत आधार तैयार किया है। उन्होंने कहा कि भारत हवाई अड्डों, बंदरगाहों, एक्सप्रेसवे, रेलवे, अंतर्देशीय जलमार्गों, पावर इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक पार्कों सहित बुनियादी ढांचे में हर वर्ष करीब 130 बिलियन डॉलर का निवेश कर रहा है।

भारत-रूस की तकनीकी ताकतों के मेल पर जोर

गोयल ने कहा कि भारत के पास युवा और महत्वाकांक्षी आबादी के साथ प्रतिभा और कौशल की मजबूत क्षमता है। रूस के पास एयरोस्पेस, धातुकर्म, परमाणु प्रौद्योगिकी और खनन जैसे क्षेत्रों में दशकों का अनुभव है। दोनों देशों की क्षमताओं के एक साथ आने से संबंध व्यापार से आगे बढ़कर दोनों अर्थव्यवस्थाओं को मजबूत करने में मदद कर सकते हैं।

‘भरोसा’ भारत-रूस संबंधों की सबसे बड़ी ताकत

भारत-रूस के दीर्घकालिक संबंधों का उल्लेख करते हुए गोयल ने कहा कि इन संबंधों ने बदलती दुनिया के सात दशकों का उतार-चढ़ाव देखा है। अब दोनों देशों के सामने सहयोग को और तेजी से आगे बढ़ाने की चुनौती है। पीएम मोदी का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि भारत-रूस संबंधों की सबसे बड़ी ताकत भरोसा है, जो दोनों देशों के संयुक्त प्रयासों को दिशा और गति देता है।

पहली बार भारत में हुआ इनोप्रोम का आयोजन

गोयल ने भारत में पहली बार इनोप्रोम के आयोजन को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि एक दशक से अधिक समय से इनोप्रोम वैश्विक औद्योगिक प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी के रूप में रूसी इंजीनियरिंग और विनिर्माण क्षमताओं को दुनिया के सामने रखने का मंच रहा है। भारत में इसका आयोजन दोनों देशों के संबंधों को “प्रोटोकॉल से प्रोडक्शन और इरादे से इंडस्ट्री” की दिशा में ले जाने का संकेत है।

आर्थिक और औद्योगिक सहयोग को मिलेगी गति

गोयल ने कहा कि दोनों देशों के मंत्रालय पिछले कुछ महीनों से आर्थिक और औद्योगिक सहयोग को मजबूत करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि रूस के उद्योग एवं व्यापार मंत्री एंटोन अलीखानोव की भारत यात्रा इस प्रगति को और गति देगी। उन्होंने रूसी प्रतिनिधिमंडल और इनोप्रोम इंडिया 2026 में शामिल कारोबारियों को सफलता की शुभकामनाएं दीं।

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