केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को कृषि भवन में आयोजित कार्यक्रम में डिजिटल इंडिया भूमि रिकॉर्ड आधुनिकीकरण कार्यक्रम (डीआईएलआरएमपी) 3.0 के परिचालन दिशानिर्देशों का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में राज्यों के राजस्व एवं पंजीकरण मंत्रियों, प्रधान सचिवों और वरिष्ठ अधिकारियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हिस्सा लिया। डीआईएलआरएमपी 3.0 के तहत वर्ष 2026-2031 के लिए 565.50 करोड़ रुपए के बजटीय प्रावधान के साथ एकीकृत, GIS-आधारित ‘लैंड स्टैक’ विकसित किया जाएगा।
भूमि किसानों के गौरव और पीढ़ियों की विरासत का प्रतीक : शिवराज
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि डीआईएलआरएमपी 3.0 ग्रामीण नागरिकों, किसानों और संपत्ति मालिकों के लिए जीवन को आसान बनाने की दिशा में निर्णायक कदम है। उन्होंने कहा कि भारत में भूमि का संबंध भावनात्मक और पारिवारिक पहचान से गहराई से जुड़ा है, इसलिए भूमि से जुड़े सटीक और आसानी से उपलब्ध दस्तावेज बेहद महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा, “भूमि केवल जमीन का एक टुकड़ा नहीं है, यह हमारे किसानों का गौरव, हमारे पूर्वजों का आशीर्वाद और भावी पीढ़ियों की पहचान है।”
99.90% अधिकार अभिलेखों का डिजिटलीकरण पूरा
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि डीआईएलआरएमपी के पिछले चरणों में 99.90% अधिकार अभिलेख (RoR) और 97% कैडस्ट्रल मैप्स का डिजिटलीकरण पूरा किया जा चुका है। वहीं, 99% सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों का कंप्यूटरीकरण भी पूरा हो चुका है। डीआईएलआरएमपी 3.0 अब अलग-अलग स्तर पर डिजिटलीकरण से आगे बढ़कर पूरी प्रणाली के एकीकरण की दिशा में काम करेगा। इससे किसानों को संस्थागत ऋण हासिल करने में आसानी होगी और नागरिकों को सरकारी दफ्तरों के बार-बार चक्कर लगाने से राहत मिलेगी।
GIS आधारित ‘लैंड स्टैक’ से जुड़ेंगे भूमि रिकॉर्ड
डीआईएलआरएमपी 3.0 के तहत एकीकृत डिजिटल ‘लैंड स्टैक’ विकसित किया जाएगा। इसमें जियो-रेफरेंस्ड कैडस्ट्रल मैप, अधिकारों के रिकॉर्ड, संपत्ति पंजीकरण और संबंधित अदालती मामलों जैसी भूमि से जुड़ी विभिन्न जानकारियों को GIS आधारित डिजिटल इंटरफेस के माध्यम से एक साथ लाया जाएगा। राज्य API के माध्यम से अपने विभिन्न भूमि संबंधी डेटासेट और प्रणालियों को एकीकृत कर अपना लैंड स्टैक विकसित कर सकेंगे। राज्य स्तरीय लैंड स्टैक मिलकर संघीय तरीके से विकसित किए जाने वाले राष्ट्रीय लैंड स्टैक के निर्माण का आधार बनेंगे।
हर भू-खंड को मिलेगा 14 अंकों वाला भू-आधार
कार्यक्रम के तहत देश के प्रत्येक भू-खंड को 14 अंकों वाला यूनिवर्सल लैंड पार्सल आइडेंटिफिकेशन नंबर (ULPIN) यानी भू-आधार प्रदान किया जाएगा। इसका उद्देश्य प्रत्येक संपत्ति की स्पष्ट और विशिष्ट पहचान सुनिश्चित करना तथा भूमि से जुड़े धोखाधड़ी के मामलों को कम करना है। इसके साथ ही कैडस्ट्रल मैप्स का पूर्ण जियो-रेफरेंसिंग किया जाएगा।
75 सब-रजिस्ट्रार कार्यालय बनेंगे आधुनिक पंजीकरण सेवा केंद्र
डीआईएलआरएमपी 3.0 के तहत ज्यादा भीड़ वाले 75 सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों को पासपोर्ट सेवा केंद्रों की तर्ज पर आधुनिक पंजीकरण सेवा केंद्र (RSK) के रूप में विकसित किया जाएगा। इन केंद्रों में डिजिटल कतार प्रबंधन और नागरिकों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
पुराने भूमि रिकॉर्ड को स्कैन कर डिजिटल रूप में सुरक्षित किया जाएगा
पुश्तैनी जमीन से जुड़े विवादों को कम करने और पुराने अधिकारों की सुरक्षा के लिए जमीन और संपत्ति के पुराने पंजीकरण रिकॉर्ड को व्यवस्थित रूप से स्कैन कर डिजिटल रूप में सुरक्षित रखा जाएगा। इससे पुराने दस्तावेजों तक पहुंच आसान होगी और भूमि स्वामित्व से जुड़े रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।
पंजीकरण रिपॉजिटरी से आसान होगा संपत्ति सत्यापन
पंजीकरण रिपॉजिटरी में पंजीकृत दस्तावेजों और संपत्ति से जुड़ी देनदारियों या ऋण की जानकारी उपलब्ध होगी। यह सुरक्षित डिजिटल प्लेटफॉर्म भूमि के स्वामित्व के सत्यापन, पुराने खरीद-बिक्री के इतिहास और संपत्ति से जुड़ी जरूरी जांच को आसान बनाने में मदद करेगा।
पेपरलेस होंगी राजस्व अदालतें
राजस्व न्यायालय मामला प्रबंधन प्रणाली (RCCMS) को आधुनिक बनाकर सीधे भूमि रिकॉर्ड से जोड़ा जाएगा। इसका उद्देश्य लंबित मामलों की संख्या कम करना और म्यूटेशन से जुड़े मामलों के निपटारे में तेजी लाना है। इससे राजस्व अदालतों में कागजी प्रक्रिया पर निर्भरता भी कम होगी।
शहरी भूमि रिकॉर्ड के लिए NAKSHA को मिलेगी गति
अर्बन लैंड मैपिंग (NAKSHA) पायलट प्रोजेक्ट को गति दी जाएगी। इसके तहत सटीक और GIS आधारित शहरी भूमि रिकॉर्ड तैयार किए जाएंगे तथा अर्बन प्रॉपर्टी कार्ड (UrPro कार्ड) जारी किए जाएंगे। इससे शहरी क्षेत्रों में संपत्तियों की पहचान और रिकॉर्ड प्रबंधन को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिलेगी।
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 100% केंद्रीय वित्तपोषण
डीआईएलआरएमपी 3.0 को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 100% केंद्रीय वित्तपोषण के साथ चरणबद्ध और प्रदर्शन आधारित व्यवस्था के तहत लागू किया जाएगा। कार्यक्रम का वित्तीय प्रबंधन सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (PFMS) के माध्यम से किया जाएगा।
रियल टाइम निगरानी के लिए उन्नत MIS डैशबोर्ड
कार्यक्रम की प्रगति की रियल टाइम निगरानी उन्नत डीआईएलआरएमपी-MIS डैशबोर्ड के जरिए की जाएगी। इसकी निगरानी परियोजना अनुमोदन एवं निगरानी समिति (PS&MC) करेगी। कार्यक्रम के दौरान ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. चंद्र शेखर पेम्मासानी ने भी डीआईएलआरएमपी 3.0 के महत्व को रेखांकित किया। भूमि संसाधन विभाग के सचिव नरेंद्र भूषण ने दिशानिर्देशों का संदर्भ प्रस्तुत किया, जबकि संयुक्त सचिव (LR) पारिकिपांडला नरहरि ने योजना की तकनीकी संरचना और प्रमुख घटकों पर प्रस्तुति दी।

















